भारत सरकार ने परीक्षा पर्चा लीक रोकने के लिए नया कानून, पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 लागू कर दिया है। इसके तहत अब दोषियों को 7 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। कानून में तेज सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का भी प्रावधान है।
परीक्षा पर्चा लीक पर सरकारी नकेल?
भारत सरकार ने परीक्षा में होने वाली धांधली को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद, पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 लागू हो गया है। यह कानून परीक्षा पर्चा लीक और अन्य अनुचित साधनों के खिलाफ पहले से कहीं ज़्यादा सख़्त है। इस कानून का असर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) और स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) जैसी बड़ी केंद्रीय परीक्षाओं पर पड़ेगा।
क्या हैं नए प्रावधान?
इस नए कानून के तहत, परीक्षा पर्चा लीक जैसे संगठित अपराधों के लिए न्यूनतम सज़ा 7 साल की जेल होगी। वहीं, अगर कोई सिंडिकेट इसमें शामिल पाया जाता है, तो उस पर ₹10 करोड़ तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। कानून में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों की भी व्यवस्था की गई है। इसके अनुसार, चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के अंदर सुनवाई पूरी करनी होगी, जबकि जांच के लिए सिर्फ 2 महीने का समय मिलेगा। इसका मकसद न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी को खत्म करना और परीक्षाओं की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा बहाल करना है।
कंपनियों और टेस्टिंग एजेंसियों पर असर
यह नया कानून उन कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है जो सरकारी परीक्षाओं के लिए IT इंफ्रास्ट्रक्चर, टेस्टिंग सेवाएं और डिजिटल सुरक्षा प्रदान करती हैं। EdTech और टेस्टिंग सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को अब ज़्यादा सख़्त नियमों का पालन करना होगा। सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक होने पर उन्हें भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, इन फर्मों को अपनी सुरक्षा प्रणालियों और ऑडिट प्रक्रियाओं को और मज़बूत करना होगा।
क्या कानून का पालन हो पाएगा?
हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस कानून का सफल कार्यान्वयन एक बड़ी चुनौती होगी। कई कानूनों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट के बावजूद कर्मचारियों की कमी, अपीलीय प्रक्रियाओं की जटिलता और चार्जशीट दाखिल करने में देरी जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। इस कानून की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि न्यायपालिका और राज्य सरकारें कितनी जल्दी इन विशेष अदालतों की स्थापना करती हैं और जांच एजेंसियां तय समय-सीमा का पालन कर पाती हैं।
निवेशकों और सरकारी परीक्षाओं से जुड़े अनुबंधों वाली कंपनियों के स्टेकहोल्डर्स को इन कंपनियों द्वारा अपनी सुरक्षा और गवर्नेंस फ्रेमवर्क को अपनाने पर नज़र रखनी चाहिए। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में और भी निवारक नियम लाए जा सकते हैं, जिसमें नेशनल टेक्निकल कमेटी ऑन पब्लिक एग्जामिनेशन का गठन भी शामिल हो सकता है। यह देखना अहम होगा कि यह नया कानून परीक्षा घोटालों पर प्रभावी रूप से लगाम लगा पाता है या नहीं।
