Mumbai ITAT ने एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि रीडेवलपमेंट वाले फ्लैट्स पर कैपिटल गेन्स टैक्स की गणना के लिए पुरानी खरीद की तारीख ही मानी जाएगी। यह फैसला उन घर मालिकों के लिए बड़ी राहत है जो अपनी प्रॉपर्टी बेचने पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स का लाभ उठाना चाहते हैं।
इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) की मुंबई बेंच ने हाउसिंग सोसाइटी के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में शामिल घर मालिकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। ट्रिब्यूनल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फ्लैट के रीडेवलपमेंट के बाद भी, होल्डिंग पीरियड की गणना अलॉटमेंट की तारीख से नहीं, बल्कि फ्लैट की मूल खरीद (Original Date of Purchase) की तारीख से ही की जाएगी। यह स्पष्टीकरण कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) की देनदारी तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगा।
विवाद की जड़ क्या थी?
मामला एक ऐसे टैक्सपेयर का है जिसने 2006 में एक फ्लैट खरीदा था। वर्षों बाद सोसाइटी का रीडेवलपमेंट हुआ और 2018 में उन्हें नया यूनिट मिला। नया फ्लैट मिलते ही उन्होंने उसे बेच दिया। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का तर्क था कि नया फ्लैट मिलने और बेचने के बीच का समय बहुत कम है, इसलिए इसे 'शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन' माना जाना चाहिए। इस तरह वे टैक्सपेयर को इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से ज्यादा टैक्स देने के लिए मजबूर करना चाहते थे, जबकि 'लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन' में टैक्स की दरें कम होती हैं और इंडेक्सेशन का फायदा भी मिलता है।
इस फैसले का महत्व
इंडियन टैक्स लॉ के मुताबिक, अगर कोई प्रॉपर्टी 24 महीने से ज्यादा रखी जाती है, तो उसे लॉन्ग-टर्म एसेट माना जाता है। टैक्स विभाग होल्डिंग पीरियड को नए एग्रीमेंट की तारीख से 'रीसेट' करने की कोशिश कर रहा था, जिससे घर मालिकों से उनका लॉन्ग-टर्म निवेशक का दर्जा छिन सकता था।
ITAT ने विभाग की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि रीडेवलपमेंट के दौरान मालिक के अधिकार कभी खत्म नहीं हुए थे। ट्रिब्यूनल ने माना कि नया फ्लैट कोई नई संपत्ति नहीं, बल्कि 2006 में खरीदी गई मूल प्रॉपर्टी का ही एक प्रतिस्थापन (Substitution) है।
होम-ओनर्स के लिए क्या करें?
यह फैसला मुंबई जैसे शहरों के लिए बहुत मायने रखता है जहां पुरानी सोसाइटियों का रीडेवलपमेंट आम है। अब, जो टैक्सपेयर इस तरह के विवादों का सामना कर रहे हैं, वे इस कानूनी नजीर (Legal Precedent) का सहारा ले सकते हैं। अपनी टैक्स फाइलिंग के समय पुरानी खरीद की तारीख, रीडेवलपमेंट एग्रीमेंट और नए अलॉटमेंट के दस्तावेजों को संभाल कर रखें, ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में आप अपना पक्ष मजबूती से रख सकें।
