Income-Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने साफ किया है कि टैक्स रिटर्न में मामूली गलतियों की वजह से टैक्स विभाग रिफंड पर मिलने वाला ब्याज नहीं रोक सकता। यह एक कानूनी अधिकार है, जिसे केवल तभी रोका जा सकता है जब टैक्सपेयर जानबूझकर देरी कर रहा हो।
मुंबई स्थित Income-Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने एक अहम फैसला सुनाते हुए करदाताओं को बड़ी राहत दी है। अक्सर टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइलिंग में हुई छोटी गलतियों के कारण रिफंड मिलने में काफी प्रशासनिक देरी का सामना करना पड़ता था। अब ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल इन गलतियों के आधार पर ब्याज देने से मना नहीं किया जा सकता।
विवाद की जड़ और कानून का पक्ष
यह पूरा विवाद Income Tax Act की Section 244A से जुड़ा है। टैक्स अथॉरिटीज का तर्क था कि यदि फाइलिंग में कोई वर्गीकरण संबंधी गलती है, तो देरी करदाता की गलती मानी जाएगी। हालांकि, ITAT ने इस तर्क को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि ब्याज एक वैधानिक अधिकार है, जिसे तभी रोका जा सकता है जब विभाग यह साबित कर सके कि करदाता ने जानबूझकर असेसमेंट प्रक्रिया में बाधा डाली, जैसे कि जानकारी छिपाना या नोटिसों को नजरअंदाज करना।
3% अतिरिक्त ब्याज का प्रावधान
इस फैसले में ITAT ने Section 244A(1A) के महत्व को भी दोहराया है। यदि रिफंड किसी अपीलीय आदेश के बाद तय समय सीमा के भीतर नहीं मिलता है, तो करदाता 3% सालाना की दर से अतिरिक्त ब्याज पाने का हकदार है। ट्रिब्यूनल ने एक मामले में तो लगभग 2 साल की देरी के लिए मुआवजे का भी आदेश दिया है, जो प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।
टैक्सपेयर्स के लिए सलाह
हालांकि यह फैसला राहत भरा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गलतियों की अनदेखी की जाएगी। यह स्पष्ट है कि करदाता का सहयोग करना जरूरी है। यदि आप भी रिफंड में देरी का सामना कर रहे हैं, तो अपने सभी कम्युनिकेशन और फाइलिंग रिकॉर्ड्स को संभालकर रखें। यह दस्तावेज यह साबित करने में मदद करेंगे कि देरी विभाग की ओर से हुई है, न कि आपकी ओर से। रिफंड अटकने पर Section 244A(1A) के तहत अतिरिक्त ब्याज का दावा करना अब आपके लिए और आसान हो गया है।
