ITAT मुंबई ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि अगर बिजनेस का खर्च पत्नी के क्रेडिट कार्ड से किया गया है, तो उस पर टैक्स डिडक्शन (Tax Deduction) का दावा किया जा सकता है। बस शर्त यह है कि खर्च असली हो और बिजनेस ने उसकी प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की हो।
मुंबई स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने बिजनेस मालिकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। अब बिजनेस से जुड़े कामों के लिए परिवार के सदस्यों, खास तौर पर पत्नी के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने पर टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलेगा, बशर्ते वह खर्च जेनुइन हो और कंपनी ने उसका भुगतान वापस किया हो।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तब सामने आया जब एक टैक्सपेयर के विदेश यात्रा के ₹6.42 लाख के खर्च को टैक्स विभाग ने मानने से इनकार कर दिया था। विभाग का तर्क था कि पत्नी के कार्ड का उपयोग अनियमित है और इसे प्रोफेशनल सर्विस मानकर इस पर TDS काटा जाना चाहिए था। हालांकि, ITAT ने इस दलील को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि यहां कोई प्रोफेशनल सर्विस नहीं दी गई थी, बल्कि यह केवल बिजनेस ट्रिप (रूस और तुर्की के ट्रेड एक्सपो) का खर्च था जिसकी भरपाई की गई थी।
सावधानी जरूरी: सिर्फ पेमेंट का तरीका नहीं, खर्च की प्रकृति है अहम
यह फैसला बिजनेस ऑपरेशंस में फ्लेक्सिबिलिटी तो देता है, लेकिन रिकॉर्ड कीपिंग में कोई ढील नहीं देता। ट्रिब्यूनल ने जोर दिया है कि टैक्स डिडक्शन इस बात पर निर्भर करता है कि खर्च 'प्रोफेशनल' है या नहीं, न कि इस पर कि पेमेंट किस माध्यम से हुआ।
टैक्स ऑडिट से कैसे बचें?
आजकल भारत में टैक्स अधिकारी AIS (Annual Information Statement) और TIS (Taxpayer Information Summary) के जरिए हर हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर नजर रखते हैं। भविष्य में किसी भी परेशानी से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- ऑडिट ट्रेल: सभी इनवॉइस, ट्रैवल टिकट और बैंक स्टेटमेंट संभाल कर रखें जो साबित करें कि खर्च बिजनेस के लिए ही था।
- रीइम्बर्समेंट का रिकॉर्ड: बिजनेस बैंक अकाउंट से पत्नी के अकाउंट में की गई पेमेंट का स्पष्ट रिकॉर्ड रखें, ताकि यह साबित हो सके कि यह व्यक्तिगत उपहार नहीं, बल्कि बिजनेस का रीपेमेंट है।
- सुसंगत रिकॉर्ड: आपके फाइनेंशियल बुक्स और बैंकिंग रिकॉर्ड में कोई विसंगति नहीं होनी चाहिए, अन्यथा टैक्स अधिकारी आपसे स्पष्टीकरण मांग सकते हैं।
