Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने Spencer Stuart International BV के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि कंपनी द्वारा दी जाने वाली एग्जीक्यूटिव सर्च फीस पर 'टेक्निकल सर्विस' या 'रॉयल्टी' के नाम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
एग्जीक्यूटिव सर्च फीस पर बड़ी जीत
मुंबई ITAT की बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि नीदरलैंड स्थित Spencer Stuart को दी जाने वाली एग्जीक्यूटिव सर्च फीस, भारत-नीदरलैंड के टैक्स समझौते (DTAA) के तहत न तो 'फीस फॉर टेक्निकल सर्विसेज' (FTS) है और न ही 'रॉयल्टी'। इस फैसले के बाद टैक्स विभाग को उन एडिशन्स को हटाने का निर्देश दिया गया है, जो पहले इन पेमेंट्स पर लगाए गए थे।
ट्रिब्यूनल के वाइस प्रेसिडेंट शक्तिजीत डे और अकाउंटेंट मेंबर बिजयानंद प्रुसेथ ने कहा कि इस तरह की सर्च सर्विसेज में किसी भी प्रकार के टेक्निकल ज्ञान या 'Know-how' का ट्रांसफर नहीं होता है, जो टैक्स ट्रीटी के आर्टिकल 12 के लिए जरूरी है। यह फैसला 2011-12 से 2019-20 तक के असेसमेंट इयर्स के लिए कंपनी की स्थिति को और मजबूत करता है।
मैनेजमेंट फीस पर अभी संशय बरकरार
हालांकि, एग्जीक्यूटिव सर्च फीस के मामले में कंपनी को राहत मिली है, लेकिन लगभग ₹14.06 करोड़ की मैनेजमेंट फीस का मामला अभी भी अधर में है। इसमें IT, लीगल, मार्केटिंग और प्रशासनिक सेवाएं शामिल हैं। चूंकि ये सभी सेवाएं एक 'शेयर्ड सर्विसेज एग्रीमेंट' के तहत बंडल की गई थीं, इसलिए ITAT ने तुरंत फैसला देने के बजाय इस मामले को वापस 'असेसिंग ऑफिसर' (Assessing Officer) के पास भेज दिया है।
अब असेसिंग ऑफिसर को हर सर्विस की अलग-अलग जांच करनी होगी, ताकि यह तय किया जा सके कि कौन सी सेवा टैक्स के दायरे में आती है और कौन सी नहीं। यह Multinational कंपनियों के लिए एक बड़ी सीख है कि अपने इंटर-कंपनी एग्रीमेंट्स में सर्विसेज का विवरण स्पष्ट रखें।
