ITAT बेंगलुरु ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि टैक्स अधिकारी सिर्फ कॉर्पोरेट जैसी अकाउंटिंग न होने के आधार पर किसानों की खेती से हुई कमाई को खारिज नहीं कर सकते। ट्रिब्यूनल ने जमीन के रिकॉर्ड और APMC सेल बिल्स को वैध सबूत माना है।
बेंगलुरु स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने उन किसानों को बड़ी राहत दी है जो बैंक में जमा कैश को लेकर टैक्स अधिकारियों की सख्ती झेल रहे थे। यह पूरा मामला इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की Section 69A के तहत 'अनएक्सप्लेंड' (Unexplained) इनकम से जुड़ा था, जिसमें टैक्स विभाग ने किसान के कैश डिपॉजिट को गलत तरीके से आय मान लिया था।
डॉक्युमेंटेशन को लेकर विवाद
टैक्स विभाग का तर्क था कि किसान ने बीज और मजदूरी का कोई विस्तृत हिसाब नहीं रखा था और न ही फॉर्मल तरीके से अकाउंटिंग बुक्स मेंटेन की थीं। विभाग का मानना था कि चूंकि यह आय पहले टैक्स रिटर्न में नहीं दिखाई गई थी, इसलिए इसे वैध कृषि आय नहीं माना जा सकता। यह स्थिति उन छोटे किसानों के लिए बहुत मुश्किल खड़ी कर रही थी जो असंगठित तरीके से APMC मंडियों में अपना माल बेचते हैं।
ITAT का बड़ा फैसला
ITAT ने टैक्स विभाग के इस रुख को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि छोटे किसानों से कॉर्पोरेट स्तर की अकाउंटिंग की उम्मीद रखना तार्किक नहीं है। कोर्ट ने सबूतों के तौर पर किसान के जमीन के रिकॉर्ड (RTC) और APMC सेल बिल्स को पूरी तरह मान्य माना। इस फैसले ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि अधिकारी अब बिना ठोस आधार के कृषि आय को 'अनएक्सप्लेंड' नहीं कह सकते।
टैक्सपेयर्स के लिए सबक
यह फैसला किसानों के लिए बड़ी जीत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कैश डिपॉजिट टैक्स की जद से बाहर हो गए हैं। सबूत पेश करने की जिम्मेदारी अभी भी टैक्सपेयर की ही है। यह जीत इसलिए मुमकिन हुई क्योंकि किसान के पास लैंड रिकॉर्ड और सेल रसीदें थीं।
अगर आप भी किसान हैं, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि भले ही कृषि आय पर टैक्स छूट है, लेकिन बैंक में बड़े कैश डिपॉजिट होने पर अगर जांच बैठती है, तो आपको जमीन के कागजात और बिक्री की रसीदें दिखानी होंगी। न्यायिक संस्थाओं का यह फैसला तकनीकी बारीकियों के ऊपर जमीनी हकीकत को प्राथमिकता देता है, लेकिन कागजी सबूतों का अभाव आपको फिर भी परेशानी में डाल सकता है।
