Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) की हैदराबाद बेंच ने साफ किया है कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) मैच्योर होने पर मिलने वाली राशि 'अनएक्सप्लेंड कैश' नहीं मानी जा सकती। यह फैसला निवेशकों को डबल टैक्सेशन से बचाएगा।
ITAT की हैदराबाद बेंच ने टैक्सपेयर्स को एक बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि फिक्स्ड डिपॉजिट की मैच्योरिटी राशि को 'अनएक्सप्लेंड इनकम' के दायरे में नहीं रखा जा सकता। इस फैसले से उन निवेशकों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें टैक्स अधिकारियों की ओर से डबल टैक्सेशन का सामना करना पड़ रहा था।
डबल-काउंटिंग का खेल
विवाद तब शुरू हुआ जब एक असेसिंग ऑफिसर ने FD मैच्योरिटी से मिली राशि को नई इनकम मानते हुए उसे 'अनएक्सप्लेंड कैश' करार दे दिया। ट्रिब्यूनल ने इसे बड़ी गलती माना है। कोर्ट का कहना है कि सेविंग्स अकाउंट से FD और फिर वापस मैच्योरिटी पर वही पैसा अकाउंट में आना केवल कैपिटल का मूवमेंट है, न कि कोई नई कमाई। इस फैसले के बाद टैक्स अधिकारी अब ऐसी ट्रांजैक्शंस को नई इनकम नहीं मान सकेंगे।
अपने ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स कैसे रखें सुरक्षित?
यह राहत तो जरूर है, लेकिन टैक्सपेयर्स को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। प्रूफ देने का जिम्मा अभी भी आपके पास ही है। इनकम टैक्स विभाग किसी भी संदिग्ध डिपॉजिट की जांच कर सकता है।
अपने पैसे का 'मनी ट्रेल' (Money Trail) साफ रखें। बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और सोर्स ऑफ इनकम जैसे सैलरी स्लिप या एसेट सेल के रिकॉर्ड्स संभालकर रखें। जब भी आप सेविंग्स अकाउंट से FD में पैसा ट्रांसफर करें, तो बैंक स्टेटमेंट में उसका फ्लो साफ दिखना चाहिए। यदि भविष्य में आपको इनकम टैक्स का नोटिस मिलता भी है, तो एक व्यवस्थित फाइल आपकी सबसे बड़ी ढाल होगी।
