Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि मृत व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया री-असेसमेंट नोटिस कानूनी रूप से अमान्य है। इस निर्णय के चलते **₹8.71 करोड़** का टैक्स नोटिस रद्द कर दिया गया है।
दिल्ली स्थित ITAT बेंच ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके नाम पर टैक्स री-असेसमेंट नोटिस भेजा जाता है, तो उसे कानूनी भाषा में 'void ab initio' यानी शुरुआत से ही अमान्य माना जाएगा। यह फैसला 2009-10 के असेसमेंट ईयर से जुड़े एक प्रॉपर्टी विवाद के मामले में आया है।
क्या था पूरा मामला?
टैक्स विभाग ने साल 2013 की एक सर्च के दौरान मिले ड्राफ्ट एग्रीमेंट के आधार पर कैपिटल गेन्स को री-असेस करने की कोशिश की थी। विभाग का दावा था कि प्रॉपर्टी की बिक्री ₹9.90 करोड़ में हुई थी, जबकि रजिस्टर्ड दस्तावेजों में यह राशि ₹2.75 करोड़ दिखाई गई थी। हालांकि, विभाग से एक बड़ी चूक यह हुई कि 31 मार्च, 2016 को नोटिस उस व्यक्ति के नाम जारी किया गया, जिसकी मृत्यु अक्टूबर 2015 में ही हो चुकी थी।
कानूनी दांव-पेच और ITAT की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि कानूनी उत्तराधिकारी ने विभाग को पहले ही मृत्यु की सूचना दे दी थी, इसके बावजूद विभाग ने मृतक के खिलाफ कार्यवाही जारी रखी। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि Income Tax Act की धारा 292BB, जो मामूली तकनीकी गलतियों को सुधारने की अनुमति देती है, वह उस व्यक्ति के मामले में लागू नहीं हो सकती जो जीवित ही नहीं है।
उत्तराधिकारियों के लिए सबक
यह फैसला टैक्स प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि कानूनी नोटिस सही व्यक्ति को ही दिए जाने चाहिए। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि मृतक की संपत्ति टैक्स देनदारी से मुक्त हो गई है। विभाग के पास कानूनी उत्तराधिकारियों के खिलाफ नई कार्यवाही शुरू करने का अधिकार सुरक्षित है, बशर्ते वे निर्धारित समय-सीमा और सही प्रक्रिया का पालन करें। टैक्सपेयर्स के परिवारों को सलाह दी जाती है कि वे टैक्स नोटिस के प्रति सतर्क रहें और मृत्यु की जानकारी विभाग को समय पर देना सुनिश्चित करें।
