ITAT का बड़ा फैसला: ₹5.2 करोड़ के टैक्स नोटिस को किया खारिज, जानें क्या है पूरा मामला

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ITAT का बड़ा फैसला: ₹5.2 करोड़ के टैक्स नोटिस को किया खारिज, जानें क्या है पूरा मामला

Delhi ITAT ने एक ग्रेन ट्रेडर के खिलाफ ₹5.2 करोड़ के कैश डिपॉजिट मामले में जारी टैक्स री-असेसमेंट ऑर्डर को रद्द कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि टैक्स विभाग का आधार गलत था, क्योंकि बैंक अकाउंट की जानकारी पहले से ही फॉर्म 3CD में मौजूद थी।

टैक्स विभाग का दावा और हकीकत

मामले की शुरुआत तब हुई जब इनकम टैक्स विभाग ने एक ग्रेन ट्रेडर के बैंक अकाउंट में जमा ₹5.2 करोड़ को 'अघोषित आय' (Unexplained Income) मान लिया। विभाग ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 148 के तहत नोटिस जारी करते हुए दावा किया कि ट्रेडर ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में इस बैंक अकाउंट का खुलासा नहीं किया था।

ITAT ने क्यों दी राहत?

ट्रिब्यूनल की सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ कि भले ही मुख्य ITR फॉर्म में यह जानकारी नहीं थी, लेकिन इसे टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (Form 3CD) के साथ संलग्न बैलेंस शीट में स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया था। ITAT ने अपने फैसले में साफ कहा कि जब जानकारी ऑडिट रिपोर्ट में मौजूद है, तो उसे 'नॉन-डिस्क्लोजर' (Non-disclosure) मानना गलत है। इसके साथ ही सरकार द्वारा फाइल फिर से खोलने का कानूनी आधार खत्म हो गया।

टैक्सपेयर्स के लिए सबक

यह फैसला उन सभी बिजनेस मालिकों और व्यापारियों के लिए एक चेतावनी है, जो अपने फाइलिंग डेटा में सावधानी नहीं बरतते। टैक्स विभाग अक्सर SFT (Specified Financial Transactions) रिपोर्ट्स के आधार पर ऑटोमेटेड नोटिस जारी करता है। यदि आपके रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट में आंकड़ों का मिलान नहीं होता, तो अनावश्यक कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों और व्यापारियों को सलाह है कि वे अपने सभी बैंक खातों और वित्तीय खुलासों को हर टैक्स डॉक्यूमेंट में एक समान (Consistent) रखें ताकि किसी भी प्रकार की स्क्रूटनी से बचा जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.