ITAT Mumbai का बड़ा फैसला: रिडेवलपमेंट में फ्लैट मिलना नहीं है 'Income', टैक्स देने से राहत

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ITAT Mumbai का बड़ा फैसला: रिडेवलपमेंट में फ्लैट मिलना नहीं है 'Income', टैक्स देने से राहत

ITAT Mumbai ने उन किरायेदारों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में पुराने अधिकारों के बदले नए फ्लैट मिलते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि इस पर धारा **56(2)(x)** के तहत टैक्स नहीं लगाया जा सकता।

रिडेवलपमेंट टैक्स विवाद पर फैसला

ITAT Mumbai ने हजारों किरायेदारों के लिए राहत का रास्ता साफ कर दिया है। हाल ही में एक मामले में ट्रिब्यूनल ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें रिडेवलपमेंट के बदले मिलने वाले फ्लैट्स पर टैक्स लगाने की कोशिश की गई थी। मामला एक ऐसे टैक्सपेयर का था, जिसने मुंबई में अपनी 4 दुकानों को खाली किया और बदले में रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में 2 नए फ्लैट लिए।

धारा 56(2)(x) का पेंच

इनकम टैक्स अधिकारियों ने धारा 56(2)(x) का हवाला देकर फ्लैट्स की स्टैंप ड्यूटी वैल्यू ₹1.38 करोड़ को 'Income from Other Sources' मानकर टैक्स लगाने की कोशिश की थी। विभाग का कहना था कि संपत्ति के बदले कोई कैश ट्रांजेक्शन नहीं हुआ है, इसलिए इसे बिना किसी 'Consideration' के मिला हुआ गिफ्ट माना जाए।

ट्रिब्यूनल की कड़ी टिप्पणी

ITAT ने विभाग की इस दलील को दो कारणों से खारिज किया:

  1. कब्जा (Possession): कानून के मुताबिक 'receives' का मतलब है संपत्ति का वास्तविक कब्जा। चूंकि प्रोजेक्ट अभी निर्माणाधीन था, इसलिए टैक्सपेयर को फ्लैट का फिजिकल कब्जा नहीं मिला था।
  2. वैध लेनदेन: ट्रिब्यूनल ने माना कि 'Tenancy Rights' (किरायेदारी अधिकार) एक बड़ी कैपिटल एसेट हैं। इसे सरेंडर करना ही अपने आप में एक वैल्युएबल कंसीडरेशन है।

इसका मतलब यह हुआ कि किरायेदार को मिले फ्लैट्स कोई मुफ्त गिफ्ट नहीं हैं, बल्कि उनके अधिकारों की भरपाई हैं। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया है कि किरायेदारी अधिकार छोड़ने पर 'Capital Gains' टैक्स के नियम अलग से लागू हो सकते हैं, इसलिए अपने कागजी दस्तावेज हमेशा दुरुस्त रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.