ITAT Kolkata का बड़ा फैसला: घर खरीदारों को मिली टैक्स राहत, स्टैम्प ड्यूटी विवाद में मिली जीत

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ITAT Kolkata का बड़ा फैसला: घर खरीदारों को मिली टैक्स राहत, स्टैम्प ड्यूटी विवाद में मिली जीत

ITAT Kolkata ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि प्रॉपर्टी की टैक्स देनदारी का निर्धारण रजिस्ट्रेशन की तारीख के बजाय एग्रीमेंट के समय तय स्टैम्प ड्यूटी रेट्स के आधार पर होगा। यह फैसला उन घर खरीदारों के लिए बड़ी राहत है जो प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के कारण अतिरिक्त टैक्स नोटिस का सामना कर रहे थे।

कोलकाता स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने उन टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है जो प्रॉपर्टी वैल्यूएशन विवादों में उलझे हुए थे। न्यायाधिकरण ने साफ किया है कि प्रॉपर्टी की खरीद के समय जो एग्रीमेंट हुआ था, उसी समय के स्टैम्प ड्यूटी रेट्स को प्राथमिकता दी जाएगी, न कि फाइनल रजिस्ट्रेशन के समय की दरों को।

टैक्स विवाद की असली वजह

यह मामला एक ऐसे व्यक्ति का है जिसने जनवरी 2021 में ₹1.23 करोड़ में एक प्रॉपर्टी खरीदने का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किया था। खरीदार ने बैंकिंग चैनलों के जरिए ₹91 लाख का बड़ा एडवांस पेमेंट भी कर दिया था। हालांकि, जब सितंबर 2023 में रजिस्ट्रेशन का काम पूरा हुआ, तो सरकारी सर्कल रेट बढ़ने की वजह से स्टैम्प ड्यूटी वैल्यूएशन बढ़कर ₹1.46 करोड़ हो गई थी।

टैक्स अधिकारियों ने इस अंतर को 'अदर इनकम' मानते हुए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 56(2)(x) के तहत खरीदार की आय में ₹11.35 लाख की अतिरिक्त राशि जोड़ दी और उस पर टैक्स की मांग की।

क्यों खरीदार के पक्ष में आया फैसला?

ITAT कोलकाता ने टैक्स विभाग के इस तर्क को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कानून में ऐसी सुरक्षा पहले से मौजूद है जो खरीदार को एग्रीमेंट और रजिस्ट्रेशन के बीच की समयावधि में बाजार में होने वाली उतार-चढ़ाव की सजा नहीं दे सकती। चूंकि खरीदार के पास 2021 का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट था और भुगतान के ठोस बैंकिंग सबूत थे, इसलिए पुरानी वैल्यूएशन को ही सही माना गया।

घर खरीदारों के लिए सबक

यह फैसला साफ करता है कि रियल एस्टेट सौदों में वित्तीय दस्तावेजों का सही होना कितना जरूरी है। यदि आप भी प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • रजिस्टर्ड एग्रीमेंट: हमेशा एग्रीमेंट को रजिस्टर करवाएं।
  • बैंकिंग ट्रेल: भुगतान हमेशा आधिकारिक बैंकिंग चैनलों के जरिए करें।

यदि खरीद की कीमत स्टैम्प ड्यूटी वैल्यू से 10% से ज्यादा कम होती है, तो टैक्स विभाग की नजर अक्सर ऐसी डील्स पर रहती है। ऐसे में आपके पास पूरे पेपरवर्क का होना ही आपको भविष्य में कानूनी और टैक्स संबंधी परेशानियों से बचा सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.