Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) चंडीगढ़ ने हरियाणा के एक करदाता को ₹11.22 करोड़ के टैक्स विवाद को फिर से चुनौती देने का मौका दिया है। राहत की शर्त है कि करदाता को 500 पेड़ लगाने होंगे।
कानूनी गलियारों से एक बेहद दिलचस्प खबर सामने आई है। चंडीगढ़ स्थित Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने एक करदाता को ₹11.22 करोड़ के टैक्स एडिशन को चुनौती देने के लिए एक नई शुरुआत का मौका दिया है। हालांकि, यह मौका बिना किसी शर्त के नहीं है; ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया है कि करदाता को पानीपत के यमुना बैंक पर एक महीने के भीतर 500 पेड़ लगाने होंगे। यह मामला फाइनेंशियल ईयर 2017-18 का है।
विवाद की जड़ क्या है?
मामले की शुरुआत तब हुई जब करदाता ने अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में महज ₹1,79,160 की आय दिखाई थी। लेकिन, इनकम टैक्स विभाग की स्क्रूटनी में यह खुलासा हुआ कि उनकी कुल आय ₹11,23,87,670 है, जिसके बाद टैक्स का भारी-भरकम बोझ उन पर डाल दिया गया।
विभाग ने कई संदिग्ध एंट्रीज को पकड़ा था, जिसमें डिमॉनेटाइजेशन के दौरान ₹85.93 लाख की कैश डिपॉजिट, ₹9.26 करोड़ का अनसिक्योर्ड लोन और ₹1.07 करोड़ के सेंड्री क्रेडिटर्स शामिल थे। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 68 के तहत, अगर कोई अपनी आय का स्रोत नहीं बता पाता, तो उसे अनएक्सप्लेंड इनकम मानकर उस पर भारी टैक्स और पेनल्टी लगाई जाती है।
ट्रिब्यूनल का रुख और शर्त
ITAT ने इस मामले को फिर से असेसिंग ऑफिसर (AO) के पास भेज दिया है ताकि करदाता अपने दावों को सबूतों के साथ साबित कर सके। ट्रिब्यूनल का मानना है कि केवल प्रक्रियात्मक चूक के आधार पर फैसला सुनाने के बजाय, तथ्यों की सही जांच होना जरूरी है।
करदाता ने खुद ही 'हरी यमुना सहयोग समिति' NGO के साथ मिलकर पेड़ लगाने की पेशकश की थी। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि यदि यह शर्त 30 दिनों के अंदर पूरी नहीं की गई, तो ₹11.22 करोड़ की टैक्स डिमांड को अंतिम और बाध्यकारी माना जाएगा। यह मामला सभी बिजनेस मालिकों के लिए एक सबक है कि अपने अनसिक्योर्ड लोन और कैश ट्रांजेक्शन का सही पेपर ट्रेल रखना कितना जरूरी है।
