ITAT में स्टाफ की भारी किल्लत: क्या टैक्स विवादों के निपटारे में होगी और देरी?

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ITAT में स्टाफ की भारी किल्लत: क्या टैक्स विवादों के निपटारे में होगी और देरी?

Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) में स्टाफ की कमी का मुद्दा गरमा गया है। संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, **126** स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल **98** सदस्य ही काम कर रहे हैं, जिससे कंपनियों के पेंडिंग टैक्स मामलों के हल होने में रुकावट आ रही है।

टैक्स विवाद सुलझाने वाली प्रमुख संस्था Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) इन दिनों गंभीर प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रही है। 7 अगस्त, 2026 को संसद में पेश की गई अपनी 166वीं रिपोर्ट में संसदीय समिति ने इस बात पर चिंता जताई है कि ट्रिब्यूनल न केवल ज्यूडिशियल बल्कि सपोर्ट स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा है।

लंबित मामलों का बढ़ता बोझ

1 मई, 2026 के आंकड़ों के अनुसार, ट्रिब्यूनल में कुल 126 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत सिर्फ 98 लोग हैं। इस खाली जगह की वजह से कोर्ट की कार्यवाही की रफ्तार धीमी पड़ गई है। आलम यह है कि महज 5 महीनों में लंबित मामलों की संख्या में 19,275 की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कॉरपोरेट्स के लिए क्यों है यह अहम?

इन्वेस्टर्स और लिस्टेड कंपनियों के लिए ITAT का सुचारू रूप से काम करना बहुत जरूरी है। जब टैक्स डिस्प्यूट लंबे समय तक लटके रहते हैं, तो कंपनियों की 'कंटिजेंट लायबिलिटीज' (Contingent Liabilities) पर अनिश्चितता बनी रहती है। इसका असर कंपनियों की बैलेंस शीट और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर पड़ता है, जिससे निवेशक असमंजस में रहते हैं।

समिति की सिफारिशें

संसदीय पैनल ने सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और सपोर्ट स्टाफ के टर्नओवर को मैनेज करने के लिए 'रिजर्व पैनल' तैयार किया जाए। इसके अलावा, मुंबई में आधुनिक मुख्यालय बनाने और कोलकाता, अहमदाबाद व गुवाहाटी में बुनियादी ढांचे के कामों पर कड़ी नजर रखने की सलाह भी दी गई है। अगर इन सिफारिशों पर जल्द अमल होता है, तो टैक्स विवादों के तेजी से निपटारे की उम्मीद जगेगी, जो बाजार के लिए एक पॉजिटिव संकेत होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.