ITAT Delhi ने एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) क्लेम करने के लिए 'Form 67' दाखिल करना अनिवार्य (Mandatory) नहीं बल्कि एक प्रक्रियात्मक (Directory) औपचारिकता है।
टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) दिल्ली ने एक बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट (FTC) लेने के लिए 'Form 67' का समय पर फाइल होना 'अनिवार्य' नहीं है। यह फैसला उन लोगों के लिए गेम-चेंजर है जिन्हें तकनीकी देरी के कारण भारी टैक्स डिमांड का सामना करना पड़ रहा था।
क्या था पूरा मामला?
इस मामले में एक टैक्सपेयर ने अमेरिका में हुई कमाई पर ₹23.48 लाख का टैक्स क्रेडिट मांगा था, ताकि उसे डबल टैक्सेशन से बचा जा सके। हालांकि, Income Tax रिटर्न के साथ फॉर्म जमा न करने के कारण विभाग ने इसे खारिज कर दिया और ₹30 लाख की भारी भरकम डिमांड निकाल दी थी। ट्रिब्यूनल ने माना कि महज एक फॉर्म न भरने के कारण किसी जायज टैक्स बेनिफिट को नहीं रोका जा सकता।
'सिस्टम' नहीं, 'मेरिट' है जरूरी
ITAT ने सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) और असेसिंग ऑफिसर (AO) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों का काम सिर्फ ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए क्लेम रिजेक्ट करना नहीं है। उन्हें टैक्स क्रेडिट की असलियत को वेरिफाई करना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने Delhi High Court के एक पुराने फैसले (Real Time Data Services (P.) Ltd. v. PCIT) का हवाला देते हुए कहा कि कानून की व्याख्या ऐसी होनी चाहिए जो टैक्सपेयर्स को न्याय दिलाए, न कि उन्हें तकनीकी बाधाओं में फंसाए।
अब आगे क्या?
ITAT ने असेसिंग ऑफिसर को निर्देश दिए हैं कि वे इस ₹23.48 लाख के क्लेम की फिर से जांच करें। अगर विभाग को कोई कमी दिखती है, तो उन्हें बकायदा एक तर्कसंगत आदेश जारी करना होगा। यह ruling स्पष्ट करती है कि टैक्स फाइलिंग में 'प्रोसेस' महत्वपूर्ण है, लेकिन वह 'सब्सटेंस' यानी वास्तविक टैक्स अधिकार से बढ़कर नहीं हो सकती।
