ITAT बंगलौर ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि ऑनलाइन गेमिंग पर टैक्स केवल 'नेट विनिंग्स' (Net Winnings) पर ही देय होगा, न कि कुल जमा राशि (Gross Deposits) पर।
इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) बंगलौर ने ऑनलाइन गेमिंग टैक्स को लेकर चल रही अनिश्चितता को दूर करते हुए एक बड़ा आदेश दिया है। 'अरेकेरे चनप्पा विश्वनाथ बनाम आईटीओ' (Arakere Channappa Vishwanath vs ITO) मामले में ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि टैक्स का आधार 'नेट विनिंग्स' ही होगा, न कि गेमिंग वॉलेट में आने-जाने वाला कुल पैसा।
क्यों था यह फैसला जरूरी?
अब तक टैक्स विभाग अक्सर गेमिंग अकाउंट में सर्कुलेट होने वाली कुल क्रेडिट राशि पर टैक्स की मांग करता था, भले ही यूजर को अंत में नुकसान हुआ हो। एक केस में तो टैक्स अधिकारी ने ₹2.33 करोड़ की ग्रॉस विनिंग पर टैक्स मांग लिया था, जबकि यूजर को असल में ₹28 लाख का नेट नुकसान हुआ था। ITAT ने इस गलत पद्धति को खारिज करते हुए कहा कि टैक्स वास्तविक कमाई पर लगता है, न कि केवल फंड के मूवमेंट पर।
'रियल इनकम' का सिद्धांत
ट्रिब्यूनल ने 'रियल इनकम' (Real Income) के सिद्धांत पर जोर दिया। उनका तर्क है कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर पैसा जमा करना और निकालना इनकम नहीं है। इनकम केवल वही है जो अंत में मुनाफे के रूप में बचती है। यह फैसला उन पुराने मामलों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा जहाँ टैक्स विभाग पुरानी व्याख्याओं का इस्तेमाल कर भारी-भरकम डिमांड भेज देता था।
अनुपालन और सावधानियां (Compliance & Risks)
हालाँकि यह फैसला राहत देने वाला है, लेकिन इसका फायदा उठाने के लिए आपके पास पुख्ता सबूत होने चाहिए। आपको अपने गेमिंग ट्रांजेक्शन का पूरा ऑडिट ट्रेल रखना होगा:
- बैंक स्टेटमेंट: सभी डिपॉजिट और विड्रॉल का रिकॉर्ड।
- प्लेटफॉर्म हिस्ट्री: गेमिंग ऐप की ट्रांजेक्शन डिटेल।
- सबूत: नुकसान या जीत का स्पष्ट ब्योरा।
अगर आप अपनी कमाई का सही हिसाब नहीं रख पाते हैं, तो टैक्स अथॉरिटी अभी भी आपसे सवाल कर सकती हैं। इसलिए, गेमिंग में शामिल लोगों के लिए अब अपने हर ट्रांजेक्शन का हिसाब रखना अनिवार्य है ताकि वे अनचाहे टैक्स विवादों से बच सकें।
