IndusInd General Insurance: कानूनी पचड़े से बड़ी राहत, ITAT ने पुराने टैक्स विवाद पर लगाई मुहर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
IndusInd General Insurance: कानूनी पचड़े से बड़ी राहत, ITAT ने पुराने टैक्स विवाद पर लगाई मुहर

Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने IndusInd General Insurance के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 'क्लीन स्लेट' (clean slate) सिद्धांत के तहत कंपनी की पुरानी टैक्स देनदारियों को खत्म कर दिया है, जिससे Reliance Capital के दिवालिया होने के बाद से चल रहे एक दशक पुराने विवाद का अंत हो गया है।

कानूनी जीत और 'क्लीन स्लेट' का आधार

मुंबई स्थित ITAT बेंच ने कंपनी को भारी राहत दी है। इस फैसले के तहत 2011 से 2021 के बीच की सभी टैक्स डिमांड्स को अब कानूनी रूप से खत्म मान लिया गया है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि NCLT द्वारा मंजूर रिजॉल्यूशन प्लान सभी पर बाध्यकारी है, जिसमें आयकर विभाग भी शामिल है।

NCLT और दिवाला प्रक्रिया का महत्व

यह विवाद तब से चल रहा था जब कंपनी Reliance General Insurance के नाम से जानी जाती थी (अब रीब्रांडिंग के बाद IndusInd General Insurance)। ट्रिब्यूनल ने Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) की धारा 31 का हवाला देते हुए कहा कि रिजॉल्यूशन प्रक्रिया का उद्देश्य नए मालिक को पुरानी वित्तीय बाधाओं से मुक्त एक 'नई शुरुआत' देना है। विभाग का यह तर्क खारिज कर दिया गया कि टैक्स कानून दिवाला प्रक्रिया से अलग हैं, क्योंकि वे खुद इस प्रक्रिया का हिस्सा थे।

वित्तीय स्थिति पर नजर

भले ही कानूनी बाधा दूर हो गई हो, लेकिन कंपनी के सामने ऑपरेशनल चुनौतियां अभी भी हैं। मार्च 2026 में समाप्त तिमाही में कंपनी ने ₹50.90 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया था। अब निवेशक कंपनी के अंडरराइटिंग परफॉर्मेंस और बॉटम-लाइन स्टेबिलिटी पर नजर रख रहे हैं। भविष्य में IRDAI के कड़े नियमों का पालन करते हुए कंपनी के लिए अपने कोर बिजनेस को मजबूती देना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.