INDIA bloc ने इलेक्शन कमीशन की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों के बाद अब यह मामला कानूनी अदालत तक पहुँच गया है, जिस पर निवेशकों की भी नजरें टिकी हैं।
कानूनी लड़ाई की शुरुआत
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे बड़े नेताओं के नेतृत्व में INDIA bloc ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ औपचारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, जस्टिस सूर्य कांत ने विरोध प्रदर्शन कर रहे नेताओं को कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी थी, जिसके बाद यह मामला अदालत में स्थानांतरित हुआ है।
याचिकाओं और आरोपों का केंद्र
याचिका में वोटर लिस्ट से नाम हटाने में धांधली और प्रक्रियात्मक खामियों का आरोप लगाया गया है। विपक्षी गठबंधन ने इलेक्शन कमीशन की आंतरिक फाइलों को सार्वजनिक करने, डेटाबेस का स्वतंत्र ऑडिट करने और रिविजन प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। साथ ही, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग तेज हो गई है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि 'गवर्नेंस रिस्क' (Governance Risk) का भी सवाल है। विदेशी और घरेलू निवेशक हमेशा देश के प्रमुख संवैधानिक संस्थानों की निष्पक्षता और स्थिरता का बारीकी से आकलन करते हैं। हालांकि भारतीय इक्विटी मार्केट्स ने राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच लचीलापन दिखाया है, लेकिन सरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने से नीतिगत अनिश्चितता (Policy Uncertainty) का डर बना रहता है। अब सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले में अगला बड़ा 'ट्रिगर' साबित होगा, जो देश के प्रशासनिक माहौल और मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकता है।
