IL&FS ने अपने 23 पूर्व डायरेक्टर्स से **₹185.88 करोड़** की अतिरिक्त सैलरी और बोनस वसूलने के लिए NCLT का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी का आरोप है कि वित्तीय धांधली के चलते गलत जानकारी के आधार पर ये भुगतान किए गए थे।
विवाद की जड़: कागजों पर मुनाफा, असलियत में घाटा
यह सारा मामला साल 2013-14 से 2017-18 के बीच के फाइनेंशियल ईयर से जुड़ा है। उस समय कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट में ₹1,865.73 करोड़ का मुनाफा दिखाया था। लेकिन, जब सरकार के आदेश पर इन खातों की दोबारा जांच (Restatement) की गई, तो सामने आया कि कंपनी मुनाफे में नहीं, बल्कि ₹9,415.24 करोड़ के भारी-भरकम नुकसान में थी। IL&FS का तर्क है कि जब कंपनी प्रॉफिट में ही नहीं थी, तो डायरेक्टर्स को किया गया भारी भुगतान 'एक्सेस' यानी जरूरत से ज्यादा था।
कानूनी लड़ाई का दौर
कंपनी ने पहले सीधे बातचीत के जरिए पैसे वापस मांगे थे, लेकिन ज्यादातर पूर्व डायरेक्टर्स ने इसे मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि पुराने ऑडिटेड खातों के आधार पर मिली सैलरी को वापस मांगना कानूनी रूप से सही नहीं है। अब मामला NCLT में है, जहां कंपनी ने मांग की है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक इस रकम को एक ब्याज वाले अकाउंट में सुरक्षित रखा जाए।
डेट रिजॉल्यूशन (Debt Resolution) का स्टेटस
यह कानूनी एक्शन IL&FS की उस लंबी रेस का हिस्सा है, जिसके जरिए कंपनी अपना कर्ज कम कर रही है। 30 जून 2026 तक, IL&FS ग्रुप ने ₹50,387 करोड़ का कर्ज चुका दिया है। यह उनके कुल ₹61,000 करोड़ के टारगेट का 82.6% हिस्सा है। अब मार्केट की नजर इस बात पर है कि NCLT इस वसूली मामले में क्या अंतरिम निर्देश देता है।
