उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat 2016 की विलेज पंचायत डेवलपमेंट ऑफिसर भर्ती में हुई कथित गड़बड़ियों के मामले में देहरादून स्थित Enforcement Directorate (ED) के दफ्तर पहुंचे। एजेंसी उनके वित्तीय रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही है, जो उनके पूर्व सहयोगी के यहां हुई हालिया छापेमारी के बाद शुरू हुई है।
भर्ती प्रक्रिया और जांच का दायरा
मामला साल 2016 का है, जब राज्य में विलेज पंचायत डेवलपमेंट ऑफिसर की भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। यह पूरी प्रक्रिया 'सबऑर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन कमीशन' के तहत हुई थी। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या भर्ती में नियमों को ताक पर रखा गया और क्या इसमें कोई वित्तीय लेनदेन (Financial links) शामिल था।
वित्तीय ब्योरे की मांग
पूछताछ के दौरान, एजेंसी ने Harish Rawat से उनके और उनके परिवार के सदस्यों के Income Tax Returns और एसेट डिस्क्लोजर की विस्तृत फाइलें मांगी हैं। Rawat ने एजेंसी के साथ सहयोग करने की बात कही है, हालांकि उन्होंने इतने पुराने रिकॉर्ड्स को एक साथ जुटाने में हो रही दिक्कतों का भी जिक्र किया।
सहयोगियों पर भी शिकंजा
जांच का दायरा सिर्फ पूर्व सीएम तक सीमित नहीं है। 10 सितंबर को ED ने देहरादून में कई जगहों पर छापेमारी की, जिसमें Harish Rawat के पूर्व ओएसडी और वर्तमान पर्सनल असिस्टेंट चंदन सिंह जीना का घर भी शामिल था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां से नकदी और गहने बरामद हुए हैं, जिसने इस केस को और उलझा दिया है। इन घटनाक्रमों के बाद, 12 सितंबर को Harish Rawat ने पार्टी के सभी सक्रिय पदों से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी थी।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एजेंसी द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
