Himgiri Automobiles पर ₹21 लाख का जुर्माना, 19 साल के युवक की मौत का मामला

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Himgiri Automobiles पर ₹21 लाख का जुर्माना, 19 साल के युवक की मौत का मामला

गुरुग्राम की मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने Himgiri Automobiles Private Limited और उसके ड्राइवर को एक 19 वर्षीय युवक की 2024 में हुई सड़क दुर्घटना में मौत के मामले में ₹21.30 लाख का भुगतान करने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी को इस दावे से छूट दी गई क्योंकि दुर्घटना के समय ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।

Himgiri Automobiles को देना होगा ₹21.30 लाख का हर्जाना

गुरुग्राम की एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने Himgiri Automobiles Private Limited को आदेश दिया है कि वह मार्च 2024 में हुई एक सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले 19 वर्षीय युवक के परिवार को हर्जाना दे। ट्रिब्यूनल ने कंपनी और उसके ड्राइवर, चंद्रशेखर, को मृतक के परिजनों को ₹21.30 लाख का भुगतान संयुक्त रूप से करने का निर्देश दिया है, साथ ही 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

यह मामला तब सामने आया जब दीपक तिवारी नाम का युवक अपनी मोटरसाइकिल पर सवार था और उसी दौरान कंपनी के एक कर्मचारी द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी। घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश उसने दम तोड़ दिया।

बीमा कंपनी को क्यों मिली राहत?

देयता (Liability) को लेकर एक अहम फैसले में, ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को हर्जाने का भुगतान करने से छूट दे दी। यह निर्णय इस सबूत पर आधारित था कि दुर्घटना के समय कंपनी का वाहन चलाने वाले ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। ट्रिब्यूनल के अनुसार, वैध लाइसेंस का न होना बीमा पॉलिसी की शर्तों और मोटर वाहन अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन था। नतीजतन, जो वित्तीय देनदारी आमतौर पर बीमा कंपनी द्वारा कवर की जाती, वह पूरी तरह से वाहन के मालिक और ड्राइवर पर आ गई।

मुआवजे का बंटवारा और आगे की कार्रवाई

ट्रिब्यूनल द्वारा तय किए गए मुआवजे में ₹20.42 लाख मृतक की मां को दिए जाएंगे, जबकि उसकी बहनों को भी छोटी राशिAward की गई है। जहां यह सिविल हर्जाने का आदेश परिवार के लिए वित्तीय राहत सुनिश्चित करता है, वहीं इस दुर्घटना से संबंधित एक अलग आपराधिक मामला अभी भी जारी है। वह मामला वर्तमान में अभियोजन साक्ष्य (prosecution evidence) के चरण में है, और अगस्त 2026 के अंत में आगे की सुनवाई होने की उम्मीद है।

यह फैसला निजी व्यावसायिक संस्थाओं के लिए एक कड़ा सबक है कि वे नियामक आवश्यकताओं का पालन करने में विफल रहने पर उन्हें गंभीर वित्तीय और कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि यह सुनिश्चित करना कि कंपनी के वाहन चलाने वाले कर्मचारियों के पास वैध लाइसेंस हों। जब बुनियादी अनुपालन मानकों को पूरा नहीं किया जाता है, तो कंपनियां ऐसी बड़ी देनदारियों के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं, जिनसे वे अन्यथा बीमा कवरेज के माध्यम से बच सकती थीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.