गुजरात का Uniform Civil Code (UCC) बिल, 2026 अब आधिकारिक रूप से कानून बन गया है। राष्ट्रपति की मुहर के बाद इसे कानूनी अधिसूचना मिल गई है, जिसके तहत शादी, तलाक और उत्तराधिकार के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। हालांकि, इस फैसले का शेयर बाजार या कॉर्पोरेट सेक्टर पर कोई सीधा असर नहीं होगा।
गुजरात में Uniform Civil Code (UCC) बिल, 2026 को अब राष्ट्रपति की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। मार्च 2026 में विधानसभा से पारित होने के बाद, इसे 'गुजरात एक्ट संख्या 15, 2026' के रूप में सरकारी गजट में अधिसूचित कर दिया गया है।
कानून के मुख्य प्रावधान
इस नए कानूनी ढांचे का उद्देश्य शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए समान नियम लागू करना है। हालांकि, राज्य की Scheduled Tribes (अनुसूचित जनजातियों) को इस कानून से बाहर रखा गया है। नए नियमों के मुताबिक:
- शादी का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है।
- लिव-इन रिलेशनशिप के लिए 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।
- कानून में बहुविवाह पर रोक और उत्तराधिकार की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के प्रावधान शामिल हैं।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इन्वेस्टर और मार्केट के नजरिए से यह समझना जरूरी है कि यह पूरी तरह से राज्य की सामाजिक नीति और कानून का मामला है। इसमें कॉमर्स, इंडस्ट्री या कॉर्पोरेट रेगुलेशन से जुड़ा कोई भी प्रावधान शामिल नहीं है। इसलिए, इसका भारतीय शेयर बाजार, लिस्टेड कंपनियों या किसी भी फाइनेंशियल सेक्टर पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। इसे पूरी तरह से एक संवैधानिक और विधायी बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए।
क्रियान्वयन और राजनीतिक विवाद
सरकार अब इस कानून को लागू करने के लिए प्रशासनिक नियमों का खाका तैयार कर रही है। हालांकि, यह राह आसान नहीं रही है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस बिल का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष का तर्क है कि इससे व्यक्तिगत और धार्मिक पहचान पर असर पड़ सकता है, साथ ही जनजातीय समुदायों और अंतर-धार्मिक विवाहों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल, प्रशासन का मुख्य ध्यान प्रशासनिक तंत्र बनाने पर है, ताकि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सुचारू रूप से शुरू किया जा सके।
