Gujarat CID का बड़ा एक्शन: ₹1,071 करोड़ के साइबर फ्रॉड का सरगना असम से गिरफ्तार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gujarat CID का बड़ा एक्शन: ₹1,071 करोड़ के साइबर फ्रॉड का सरगना असम से गिरफ्तार

गुजरात CID ने असम से 25 वर्षीय रफीकुल आलम को गिरफ्तार किया है। उस पर **1,090** साइबर फ्रॉड केस को लीड करने का आरोप है, जिसमें कुल **₹1,071.5 करोड़** की धोखाधड़ी हुई। यह नेटवर्क **1,700** से ज़्यादा बैंक अकाउंट और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर चीन में पैसे भेज रहा था।

कौन है ये मास्टरमाइंड?

गुजरात पुलिस ने असम के बारपेटा से 25 साल के रफीकुल आलम को पकड़ा है। राज्य की CID (क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) का कहना है कि आलम एक बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क का सरगना है। इस नेटवर्क पर पूरे भारत में 1,090 साइबर फ्रॉड केस में शामिल होने का आरोप है, जिसमें कुल ₹1,071.5 करोड़ की चपत लगी है।

कैसे चलता था ये रैकेट?

CID के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जांच में पता चला है कि यह एक बहुत ही हाई-टेक मनी लॉन्ड्रिंग ऑपरेशन था। पीड़ितों से 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम जैसे तरीकों से पैसे वसूले जाते थे। इसमें लोगों को नकली कानूनी धमकियां देकर डराया जाता था। पकड़े गए पैसों को तुरंत ट्रैक होने से बचाने के लिए अलग-अलग कर दिया जाता था। इस रैकेट ने 1,754 अलग-अलग बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया, ताकि बड़ी रकम को चंद घंटों में छोटी-छोटी राशियों में बांटा जा सके।

चीन कनेक्शन और क्रिप्टोकरेंसी का खेल

इस ऑपरेशन का सीधा कनेक्शन चीन के अपराधी सिंडिकेट से पाया गया है। पकड़े गए आरोपी पर आरोप है कि वे विदेशी हैंडलर्स के साथ कोऑर्डिनेट करने के लिए WhatsApp और Telegram जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। क्रिप्टोकरेंसी ने इस खेल में अहम भूमिका निभाई। जांच में आरोपी के डिवाइस से 23 क्रिप्टो वॉलेट मिले हैं, जिनका इस्तेमाल पैसों को फॉरेन करेंसी में बदलने और बाहर भेजने के लिए किया जाता था। इस वजह से पैसों की रिकवरी में दिक्कतें आ रही हैं। अवैध क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग ऐप्स का भी इस्तेमाल किया गया।

बढ़ता डिजिटल फ्रॉड और बचाव

यह मामला डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज के बढ़ते खतरों और इंटरनेशनल स्कैम नेटवर्क्स की बढ़ती चालाकी को दर्शाता है। कानून लागू करने वाली एजेंसियां डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों से जूझ रही हैं, जहां अपराधी डर और अर्जेंसी का फायदा उठाकर लोगों से उनकी जमा-पूंजी छीन लेते हैं। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने कई 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों को होने से भी रोका, जिनमें बुजुर्गों को झूठे आपराधिक आरोपों में फंसाने की कोशिश की जा रही थी।

जांच अभी जारी है। यह केस आम लोगों के लिए एक रिमाइंडर है कि डिजिटल सुरक्षा कितनी ज़रूरी है और पैसों की मांग की सच्चाई को हमेशा वेरिफाई करना चाहिए, खासकर जब वे किसी अनपेक्षित कानूनी नोटिस या अर्जेंट डिजिटल कम्युनिकेशन से आ रहे हों। अधिकारियों का मुख्य फोकस अभी भी फंड्स को ट्रैक करना और सिंडिकेट के बाकी सदस्यों को पकड़ना है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.