Supreme Court ने **₹72,000 करोड़** के Great Nicobar Island प्रोजेक्ट पर Calcutta High Court की कार्यवाही को रोकने से साफ मना कर दिया है। कोर्ट ने पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की समीक्षा के लिए सुनवाई को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, जिससे इस मेगा प्रोजेक्ट से जुड़ी कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है।
कानूनी दांव-पेच और प्रोजेक्ट पर खतरा
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ₹72,000 करोड़ की लागत वाले Great Nicobar Island प्रोजेक्ट मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कलकत्ता हाई कोर्ट में चल रही कानूनी कार्यवाही पर रोक न लगाने का मतलब है कि अब पर्यावरण और स्थानीय आदिवासी अधिकारों से जुड़े मामलों की कानूनी समीक्षा जारी रहेगी। यह प्रोजेक्ट, जिसमें एक बड़ा कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, एयरपोर्ट और टाउनशिप बनाने की योजना है, अब एक बार फिर कानूनी उलझनों में फंस गया है।
प्रमुख इंफ्रा कंपनियों पर असर
निवेशकों के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Adani Ports and Special Economic Zone Ltd और JSW Infrastructure Ltd जैसी बड़ी दिग्गज कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी रुचि दिखाई है। हालांकि ये कंपनियां सीधे तौर पर कोर्ट केस का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन कानूनी लड़ाई के कारण प्रोजेक्ट के पूरा होने की टाइमलाइन और लागत पर बड़ा असर पड़ सकता है। बड़े प्रोजेक्ट्स में अक्सर ऐसी कानूनी अड़चनों के कारण स्कोप में बदलाव और लागत में बढ़ोतरी का रिस्क बना रहता है।
आगे की राह (Investors Outlook)
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तरह की कानूनी अनिश्चितताएं निवेशकों के सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट में अब 25 और 26 नवंबर 2026 को सुनवाई होनी है। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कोर्ट पर्यावरण के दावों को लेकर क्या रुख अपनाता है। अगर कोर्ट ने प्रोजेक्ट के स्वरूप में बदलाव के निर्देश दिए, तो इससे प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी और आर्थिक viability प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, संबंधित कंपनियों के शेयरधारकों के लिए इस कानूनी अपडेट पर बारीकी से नजर रखना जरूरी है।
