Parliament Session Special: महिला आरक्षण और सीटों के बढ़त पर सरकार का बड़ा दांव, जानें क्या है प्लान

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Parliament Session Special: महिला आरक्षण और सीटों के बढ़त पर सरकार का बड़ा दांव, जानें क्या है प्लान

सरकार एक बार फिर संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। यह सत्र 17 अगस्त से शुरू हो सकता है और इसका मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े विधेयकों को फिर से पेश करना है।

संसद में फिर गूंजेगा महिला आरक्षण का मुद्दा

भारतीय सरकार ने संसद का एक विशेष सत्र बुलाने की योजना बनाई है, जो 17 अगस्त, 2026 से शुरू हो सकता है। इस तीन दिवसीय सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (Delimitation) विधेयक और संघ शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विधायी सुधारों को फिर से पेश किए जाने की उम्मीद है। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को लागू करना है।

विधेयकों के पीछे का उद्देश्य और चुनौतियाँ

प्रस्तावित विधेयकों के तहत, लोकसभा में कुल सीटों की संख्या को बढ़ाकर लगभग 850 करने का लक्ष्य है। वर्तमान रणनीति का एक अहम हिस्सा महिला आरक्षण को 2026 के बाद की जनगणना के आंकड़ों से अलग करना है, ताकि मौजूदा जनसंख्या के आधार पर आरक्षण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में ऐसे ही संवैधानिक संशोधनों को पारित कराने का पिछला प्रयास असफल रहा था, जब सरकार लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी। उस समय 298 मत पक्ष में और 230 मत विपक्ष में पड़े थे।

यह विकास निवेशकों और बाजार सहभागियों के लिए कॉर्पोरेट जगत के बजाय नीति और विनियामक (Regulatory) निगरानी का विषय है। इन विधायी चर्चाओं और सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय नतीजों, कर्ज या मार्जिन के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। हालांकि, सरकार द्वारा बड़े संवैधानिक संशोधन पारित करने की क्षमता को अक्सर राजनीतिक स्थिरता और महत्वपूर्ण दीर्घकालिक नीति सुधारों को चलाने की कार्यपालिका की क्षमता के संकेतक के रूप में देखा जाता है।

राजनीतिक खींचतान और गतिरोध

इस मामले में एक बड़ा जोखिम विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से लगातार विरोध है, खासकर महिला आरक्षण और परिसीमन के एकीकरण को लेकर। दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधियों ने चिंता जताई है कि जनसंख्या के बदलते समीकरणों के कारण चुनावी सीमाओं के पुनर्निर्धारण से उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

जैसे-जैसे सरकार इस संभावित सत्र की तैयारी कर रही है, विधायी परिणाम अभी भी अनिश्चित है। इन विधेयकों की सफलता दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को पूरा करने के लिए राजनीतिक स्पेक्ट्रम में व्यापक सहमति बनाने पर निर्भर करेगी। निवेशक और विश्लेषक संभवतः सत्र की तारीखों, सरकारी अधिसूचनाओं और संसद के दोनों सदनों में मतदान प्रक्रिया पर नजर रखेंगे ताकि 2029 के चुनावी चक्र तक सरकार की विधायी प्रभावशीलता का अंदाजा लगाया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.