तमिलनाडु की एक विशेष अदालत ने GEM Group के चेयरमैन वीरमणि के खिलाफ POCSO मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद चेयरमैन की गिरफ्तारी हुई है, जिसने राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और राजनीतिक हस्तक्षेप पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और गिरफ्तारी
अक्टूबर 2025 से चर्चा में रहे इस मामले में बड़ा मोड़ तब आया, जब विशेष POCSO कोर्ट ने पुलिस द्वारा दायर उस क्लोजर रिपोर्ट को नामंजूर कर दिया जिसमें सबूतों के अभाव का हवाला दिया गया था। कोर्ट ने अब मामले की नए सिरे से गहन जांच के आदेश दिए हैं, जिससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
राजनीतिक खींचतान और विवाद
यह केस अब तमिलनाडु की राजनीति का केंद्र बन गया है। Tamilaga Vettri Kazhagam और DMK के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। राज्य के वर्तमान कानून मंत्री CTR निर्मल कुमार ने पूर्व कानून मंत्री S Regupathy की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। वहीं, Regupathy का कहना है कि क्लोजर रिपोर्ट वीडियो साक्ष्य की खराब गुणवत्ता के कारण एक सामान्य प्रक्रिया थी। हालांकि, अब यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या आरोपी को बचाने के लिए फाइलों के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह घटना एक बड़ा सबक है। माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले कॉर्पोरेट समूहों के लिए ऐसी कानूनी और राजनीतिक कंट्रोवर्सी सरकारी टेंडर, परमिट और ऑडिट पर बुरा असर डाल सकती है। जब किसी बड़े ग्रुप पर प्रक्रियात्मक हस्तक्षेप के आरोप लगते हैं, तो उससे नियामक अनिश्चितता (Regulatory Uncertainty) का माहौल बनता है।
फिलहाल, निवेशकों की नजरें कोर्ट की अगली सुनवाई और प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या यह जांच GEM Group के अन्य बिजनेस ऑपरेशंस तक भी पहुंचती है या नहीं।
