FCRA Amendment Bill: क्या सरकारी सख्ती से ठप होंगे कंपनियों के CSR प्रोजेक्ट्स?

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AuthorNeha Patil|Published at:
FCRA Amendment Bill: क्या सरकारी सख्ती से ठप होंगे कंपनियों के CSR प्रोजेक्ट्स?

22 जून 2026 को जारी FCRA संशोधन प्रस्तावों ने NGO जगत में हलचल मचा दी है। नई गाइडलाइंस के तहत विदेशी फंडिंग पाने वाली संस्थाओं के लिए अनुपालन (compliance) के नियम कड़े किए जा रहे हैं। इसका सीधा असर उन लिस्टेड कंपनियों पर पड़ सकता है जो अपने अनिवार्य CSR खर्च के लिए इन्हीं NGO के साथ मिलकर काम करती हैं।

CSR अनुपालन पर मंडराया संकट

इस समय फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में प्रस्तावित बदलावों की जांच जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी कर रही है। ये नए नियम NGO के लिए काफी सख्त हैं, जिसमें उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों और पब्लिकेशन्स की भी पूरी जानकारी देनी होगी। सरकार का लक्ष्य पारदर्शिता लाना है, लेकिन कॉरपोरेट जगत के लिए यह ऑपरेशनल मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

कंपनियों के निवेश पर क्या होगा असर?

नियमों के अनुसार, लिस्टेड कंपनियों को अपने नेट प्रॉफिट का 2% हिस्सा CSR के रूप में खर्च करना पड़ता है। कई बड़ी कंपनियां एजुकेशन, रूरल हेल्थ और स्किल डेवलपमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए NGO पर निर्भर हैं। यदि किसी NGO का लाइसेंस रद्द होता है, तो कंपनियों के सामाजिक प्रोजेक्ट्स बीच में ही लटक सकते हैं। इससे बचने के लिए अब कंपनियों को अपने पार्टनर संगठनों की ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) और ज्यादा सख्ती से करनी होगी।

एसेट मैनेजमेंट और भविष्य की चुनौतियां

प्रस्ताव में एक 'डिजाइनटेड अथॉरिटी' बनाने की बात कही गई है, जो लाइसेंस रद्द होने पर विदेशी फंड से खरीदी गई संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लेगी। चूंकि स्कूलों और क्लीनिकों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर में कंपनियों का भी पैसा लगा होता है, इसलिए यह स्थिति निवेश की स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा रही है। 2020-2022 के डेटा पर गौर करें, तो लाइसेंस नवीनीकरण में आने वाली अधिकतर बाधाएं तकनीकी थीं, न कि भ्रष्टाचार से जुड़ी।

फिलहाल, निवेशकों को इस पर नजर रखने की जरूरत है कि फाइनल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क कैसा होता है। तब तक, कंपनियां अपने पार्टनर चुनने में और अधिक सतर्कता बरत सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.