मामला क्या है?
Electrotherm (India) Limited के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है कि डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ED) ने कंपनी की ज़ब्त की गई एक कार को छोड़ दिया है। ED ने इससे पहले कंपनी के बैंक अकाउंट से ₹34.29 करोड़ और एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन मिस्टर शैलेश भंडारी के अकाउंट से ₹83.18 लाख की राशि भी फ्रीज़ की थी।
गुजरात हाईकोर्ट का दखल
ED की इन कार्रवाइयों के खिलाफ कंपनी और मिस्टर भंडारी दोनों गुजरात हाईकोर्ट पहुंचे थे। 20 जनवरी, 2026 को हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कार रिलीज़ करने का रास्ता खोला। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि कंपनी, कार की डेप्रिशिएटेड वैल्यू के बराबर ₹3.20 करोड़ का फिक्स्ड डिपॉजिट रिसीट (FDR) ED के पास जमा कराए, जिसके बाद कार रिलीज़ कर दी जाएगी।
Electrotherm (India) Limited ने तुरंत इस न्यायिक आदेश का पालन किया और ED के पक्ष में ज़रूरी FDR जमा कर दिया। नतीजतन, ED ने 04 फरवरी, 2026 को आधिकारिक तौर पर कार को ज़ब्ती से रिलीज़ कर दिया।
जांच का रिस्क अभी भी बरकरार
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि PMLA, नई दिल्ली की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने 17 जून, 2025 के एक आदेश में ED को चल संपत्ति (movable properties) ज़ब्त करने की इजाज़त दी थी। कार की ज़ब्ती भले ही FDR के ज़रिए हल हो गई है, लेकिन ED की ओर से कंपनी के खिलाफ चल रही मुख्य जांच अभी भी एक्टिव है।
यह डेवलपमेंट संपत्ति ज़ब्ती से जुड़ी कुछ तत्काल दिक्कतों को दूर करता है, लेकिन ED की व्यापक जांच जारी रहना कंपनी और उसके स्टेकहोल्डर्स के लिए एक निरंतर जोखिम बना हुआ है। निवेशक ED की जांच में आगे आने वाले घटनाक्रमों पर पैनी नज़र रखेंगे।
