Election Commission of India इस समय विवादों के घेरे में है। पूर्व ब्यूरोक्रेट Jiji Thomson द्वारा लगाए गए राजनीतिक आग्रह के आरोपों और कमिश्नरों के बीच अंदरूनी मतभेदों की खबरों ने संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोपों का केंद्र: ज्ञानेंद्र कुमार और Jiji Thomson का दावा
संस्था की साख पर सवाल तब खड़े हुए जब केरल के पूर्व मुख्य सचिव Jiji Thomson ने दावा किया कि 2019 में IAS अधिकारी रहते हुए Gyanesh Kumar ने उनसे BJP के लिए उम्मीदवारी पर चर्चा की थी। Thomson का कहना है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया था। इस खुलासे के बाद विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संस्था की तटस्थता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अंदरूनी कलह की रिपोर्ट
बाहरी आरोपों के अलावा, आयोग के भीतर की खींचतान भी सार्वजनिक हुई है। आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच, चुनाव आयुक्त Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने पैनल के फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से असहमति जताई है। यह मतभेद मुख्य रूप से मतदाता सूची के संशोधन और ऑनलाइन डेटा हैंडलिंग प्रोटोकॉल को लेकर थे।
ECI का बचाव
इन तमाम आरोपों पर Election Commission of India ने सख्ती से खंडन किया है। आयोग का कहना है कि सभी फैसले, जिसमें मतदाता सूची संशोधन भी शामिल है, तीन-सदस्यीय पैनल द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए हैं। फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को भी आयोग ने केवल एक रेगुलेटरी प्रक्रिया बताया है, न कि मानकों में कोई बड़ा बदलाव। अब देखना यह होगा कि संस्था अपनी साख को बचाने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाती है।
