Election Commission of India ने साफ किया है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए वोटर्स की डेटा जरूरतों को लेकर अंदरूनी विरोध के बीच, पोल पैनल ने तर्क दिया है कि विवादास्पद सेक्शन केवल एक अलग एनेक्शर (Annexure) है।
चुनावी पैनल में आंतरिक खींचतान
Election Commission of India (ECI) ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है कि नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में कोई अवैध बदलाव किया गया है। यह स्पष्टीकरण तब आया है जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग की कार्यप्रणाली पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।
विवाद की जड़ क्या है?
पूरा विवाद 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) स्टेटस से जुड़े सवालों को लेकर है। आवेदकों से यह जानकारी मांगी जा रही थी कि क्या उनके परिवार के सदस्य 2000 के दशक की शुरुआत से चुनावी रोल में शामिल रहे हैं। हालांकि ECI का कहना है कि यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन डिजिटल इंटरफेस में बिना इस जानकारी को भरे सबमिशन आगे नहीं बढ़ पा रहा था। आयुक्तों ने इसे 'अवैध' करार देते हुए तर्क दिया कि Registration of Electors Rules, 1960 में सरकारी संशोधन के बिना ECI के पास ऐसी शर्तें जोड़ने का अधिकार नहीं है।
तकनीकी दांव-पेच और गवर्नेंस
इस आंतरिक गतिरोध को हल करने के लिए, ECI ने दावा किया है कि फॉर्म 6 में छेड़छाड़ नहीं हुई है। पैनल का कहना है कि विवादित डेटा पॉइंट्स को 'एनेक्शर डी' (Annexure D) के रूप में एक अलग दस्तावेज के तौर पर शामिल किया गया है। इस तरह आयोग ने कानूनी संशोधन की प्रक्रिया को दरकिनार करने का रास्ता निकाला है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत और अशोक लवासा ने मौजूदा आयुक्तों की आपत्तियों को वैध बताया है, जिससे आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठने लगे हैं। तमाम विरोध के बावजूद, देश भर के आवेदकों के लिए SIR का यह नियम अभी भी प्रभावी बना हुआ है।
