Enforcement Directorate (ED) ने अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म Parimatch के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा दिया है। चार राज्यों में हुई छापेमारी में ₹3,000 करोड़ के अवैध लेनदेन और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में सेंधमारी का खुलासा हुआ है।
एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने साइप्रस स्थित बेटिंग प्लेटफॉर्म Parimatch पर अपना शिकंजा कस दिया है। एजेंसी ने महाराष्ट्र, दिल्ली-NCR, राजस्थान और गुजरात में 12 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई गैर-कानूनी तरीके से पैसों के हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग की जारी जांच का हिस्सा है।
जांच का जाल और ₹3,000 करोड़ का खेल
जांच एजेंसियां एक ऐसे जटिल नेटवर्क की छानबीन कर रही हैं जिसने महज एक साल में ₹3,000 करोड़ से ज्यादा का फंड इधर-उधर किया। इस खेल में केवल बेटिंग प्लेटफॉर्म ही नहीं, बल्कि पेमेंट गेटवे, फिनटेक कंपनियां, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी भी शामिल हैं, जिन्होंने भारत में इस अवैध कारोबार को चलाने के लिए फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया था।
पेमेंट सेक्टर के लिए क्या हैं खतरे?
यह मामला फिनटेक और पेमेंट एग्रीगेटर्स पर बढ़ती रेगुलेटरी सख्ती की याद दिलाता है। ED की जांच से पता चला है कि प्लेटफॉर्म ने 'म्यूल अकाउंट्स' (Mule Accounts) और फर्जी रिटेल आउटलेट्स का सहारा लेकर फाइनेंशियल चेक को बायपास किया। इन पैसों को पहले घुमाया जाता था और फिर हवाला के जरिए देश से बाहर भेज दिया जाता था।
अब तक की कार्रवाई में एजेंसी ने ₹112 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की है। जांच का दायरा इतना बढ़ गया है कि अब क्वीक-कॉमर्स ऐप्स पर दिए जाने वाले सरोगेट विज्ञापनों और स्पोर्ट्स लीग्स में इन कंपनियों की मौजूदगी भी रडार पर है।
मार्केट और रेगुलेशन पर असर
हालांकि Parimatch कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है, लेकिन इसका असर भारतीय फिनटेक सेक्टर पर जरूर पड़ेगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) अब पेमेंट गेटवे कंपनियों पर अधिक दबाव बना सकती हैं ताकि हाई-रिस्क मर्चेंट्स की बेहतर मॉनिटरिंग हो सके। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि आने वाले समय में फिनटेक सेक्टर में 'Compliance' का खर्च बढ़ सकता है।
