कर्नाटक में PWD मंत्री Satish Jarkiholi से जुड़े **15** से ज्यादा ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। मामला **18** शराब (Excise) लाइसेंस जारी करने में कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
बुधवार, 9 सितंबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक और महाराष्ट्र में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। यह जांच मुख्य रूप से कर्नाटक के PWD मंत्री Satish Jarkiholi से संबंधित है। एजेंसी उन आरोपों की जांच कर रही है जिनमें 18 विशिष्ट एक्साइज (बार) लाइसेंस जारी करने के बदले भ्रष्टाचार और अवैध तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा लिया गया।
पुरानी जांच का विस्तार
यह कार्रवाई जून 2026 में शुरू हुई उस जांच का अगला हिस्सा है, जिसमें मंत्री के रिश्तेदार और वरिष्ठ एक्साइज अधिकारी Y.D. Manjunath के खिलाफ छापेमारी की गई थी। उस वक्त अधिकारियों ने एक 'ब्राइब सिंडिकेट' (Bribe Syndicate) का खुलासा किया था और लगभग ₹13.3 करोड़ की संपत्ति जब्त की थी। अब ED उन कड़ियों को जोड़ रही है कि कैसे लाइसेंस से जुड़े प्रशासनिक फैसलों का इस्तेमाल अवैध पूंजी जुटाने में किया गया।
शराब कारोबार पर क्या होगा असर?
कर्नाटक के हॉस्पिटैलिटी और बेवरेज रिटेल सेक्टर के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है। शराब का पूरा कारोबार सरकारी लाइसेंसिंग के कड़े दायरे में आता है। ऐसे में जब 'ब्राइब सिंडिकेट' जैसे गंभीर आरोप लगते हैं, तो इसका सीधा असर बिजनेस ऑपरेशन्स पर पड़ता है:
- लाइसेंस रिन्यूअल में देरी: सरकारी जांच के चलते नए आवेदनों और पुराने लाइसेंसों के रिन्यूअल पर रोक लग सकती है।
- ऑपरेशनल रिस्क: अगर जांच में लाइसेंस अवैध पाए जाते हैं, तो उन्हें रद्द किया जा सकता है, जिससे कंपनियों के लिए अनुपालन (Compliance) लागत बढ़ सकती है।
- प्रशासनिक सुस्ती: जांच के दौरान सरकारी दफ्तरों में काम की रफ्तार धीमी हो सकती है, जिससे कारोबारियों को मंजूरी लेने में लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
फिलहाल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच कर रही है। भविष्य में इन 18 लाइसेंसों की स्थिति ही तय करेगी कि राज्य के एक्साइज डिपार्टमेंट और संबंधित कंपनियों पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा।
