ED ने कर्नाटक के PWD मंत्री Satish Jarkiholi से जुड़े 21 ठिकानों पर दो दिनों तक तलाशी अभियान चलाया है। जांच का केंद्र FEMA के कथित उल्लंघन, कांगो और जाम्बिया में अवैध माइनिंग निवेश और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में अनियमितताएं हैं। इस कार्रवाई में एजेंसी ने **₹3.45 करोड़** नकद बरामद किए हैं, हालांकि मंत्री ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है।
विदेशी निवेश और सरकारी ठेकों की जांच
जांच एजेंसी के निशाने पर मुख्य रूप से दो मामले हैं: बिना घोषणा किए विदेशों में किया गया माइनिंग निवेश और PWD विभाग के कॉन्ट्रैक्ट्स में हेरफेर। ईडी के मुताबिक, मंत्री के करीबियों का संबंध कांगो और जाम्बिया की माइनिंग कंपनियों से है। आरोप है कि सरकारी नियमों को ताक पर रखकर इन विदेशी वेंचर्स में फंड को डायवर्ट किया गया।
जांच के दौरान 'Bharat Vanijya Eastern Private Limited' का नाम भी सामने आया है, जो सरकारी टेंडर्स हासिल करने में अपनी भूमिका के कारण जांच के घेरे में है। अधिकारियों को संदेह है कि सरकारी ठेके पाने के लिए रिश्वत का सहारा लिया गया और उस रकम को ऑफशोर अकाउंट्स के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए ठिकाने लगाया गया।
गवर्नेंस और कानूनी रिस्क
इस घटना ने बिजनेस कम्युनिटी और इन्वेस्टर्स के लिए 'Compliance' की अहमियत को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। जब किसी कंपनी का नाम भ्रष्टाचार या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में आता है, तो उन पर कॉन्ट्रैक्ट कैंसिलेशन, ब्लैकलिस्टिंग और लंबी कानूनी लड़ाइयों का खतरा मंडराने लगता है। एजेंसी ने मौके से कई डिजिटल दस्तावेज और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स भी जब्त किए हैं। अगर जांच में 'Prevention of Corruption Act' या 'PMLA' के तहत और सबूत मिलते हैं, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल, संबंधित कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट्स का भविष्य अब रेगुलेटरी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
