Enforcement Directorate (ED) ने Supreme Court का दरवाजा खटखटाया है। एजेंसी ने PPK NewsClick Studio के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें FIR को रद्द कर दिया गया था।
Enforcement Directorate (ED) ने मई 2026 में आए दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसने PPK NewsClick Studio Pvt Ltd और इसके डायरेक्टर प्रबीर पुरकायस्थ को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से बड़ी राहत दी थी। ED ने इस मामले में 'स्पेशल लीव पिटीशन' दाखिल की है।
ED का मुख्य तर्क
एजेंसी का कहना है कि हाई कोर्ट ने शुरुआती चरण में ही मामले की सुनवाई एक पूर्ण ट्रायल की तरह की, जो प्रक्रियात्मक रूप से गलत था। ED के मुताबिक, कोर्ट को FIR की वैधता की समीक्षा के दौरान तथ्यात्मक विवादों (factual disputes) में नहीं पड़ना चाहिए था। साथ ही, एजेंसी ने हाई कोर्ट पर देरी का आरोप भी लगाया है, क्योंकि दिसंबर 2025 में फैसला सुरक्षित रखने के बाद इसे मई 2026 में सुनाया गया था।
क्या है विवाद की जड़?
यह पूरा विवाद साल 2018 के एक $1.5 मिलियन के फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) से जुड़ा है, जो Worldwide Media Holdings LLC द्वारा NewsClick में किया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप था कि कंपनी ने शेयर की वैल्यूएशन को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और विदेशी फंड का गलत इस्तेमाल किया। हालांकि, हाई कोर्ट ने इसे एक सामान्य कमर्शियल एग्रीमेंट माना था।
निवेशकों के लिए सबक
यह मामला प्राइवेट डिजिटल मीडिया सेक्टर के लिए एक बड़ा सबक है। रेगुलेटर्स अब विदेशी निवेश के दस्तावेजों, वैल्यूएशन प्रैक्टिस और फंड के इस्तेमाल की बारीकी से जांच कर रहे हैं। यदि तय लक्ष्यों और खर्च के बीच कोई भी अंतर पाया जाता है, तो कंपनियों को गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई के लिए कब हामी भरता है।
