ED की खरी खरी: घर खरीदारों को कैश डील और RERA नियमों के उल्लंघन से बचें!

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ED की खरी खरी: घर खरीदारों को कैश डील और RERA नियमों के उल्लंघन से बचें!

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घर खरीदारों को बड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। अगर कोई बिल्डर RERA रजिस्ट्रेशन की जानकारी छुपाता है या कैश में पेमेंट मांगता है, तो तुरंत इसकी रिपोर्ट करें। इसी के साथ, ED ने अहमदाबाद की Keshav Narayan Group की **₹129.80 करोड़** की संपत्ति ज़ब्त की है। यह कार्रवाई रियल एस्टेट डेवलपर्स पर बढ़ती सख्ती और सबवेन्शन स्कीमों के गलत इस्तेमाल को दर्शाती है।

घर खरीदारों के लिए ED की सख्त चेतावनी

रियल एस्टेट सेक्टर में धोखाधड़ी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घर खरीदारों को बड़ी चेतावनी दी है। एजेंसी खरीदारों से उन डेवलपर्स से सावधान रहने को कह रही है जो RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) रजिस्ट्रेशन की जानकारी देने से कतराते हैं, कैश में पेमेंट की मांग करते हैं, या वादे के मुताबिक पैसे वापस नहीं करते। यह कदम ऐसे डेवलपर्स के खिलाफ ED की बढ़ती कार्रवाई का हिस्सा है, जिन पर बिना सरकारी मंज़ूरी के धोखाधड़ी वाली स्कीम चलाने और भारी मुनाफे का झूठा वादा करने का आरोप है।

अहमदाबाद में ₹129.80 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त

मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत, ED ने अहमदाबाद की Keshav Narayan Group से जुड़ी ₹129.80 करोड़ की संपत्ति प्रोविजनली अटैच कर ली है। इस मामले में प्रमोटर्स Ronak Ravjibhai Sonani और Vipulbhai Gordhanbhai Gangani की जांच चल रही है। आरोप है कि इस ग्रुप ने जरूरी अप्रूवल, खासकर RERA रजिस्ट्रेशन के बिना ही फ्लैट और दुकानों के प्रोजेक्ट्स को मार्केट किया। जांच के अनुसार, निवेशकों को प्रोजेक्ट की लीगल वायबिलिटी के बिना ही 54% से 100% तक के बड़े रिटर्न का लालच दिया गया था।

'नो EMI' स्कीमों में छिपा है बड़ा रिस्क

ED की नई एडवाइजरी में इंडस्ट्री की एक और बड़ी चिंता पर बात की गई है - 'सबवेन्शन' स्कीमें, जिन्हें अक्सर 'कब्ज़े तक नो EMI' के नाम से बेचा जाता है। इसमें डेवलपर प्रॉपर्टी तैयार होने तक खरीदार के होम लोन की EMI खुद भरने का वादा करता है। लेकिन, अगर डेवलपर यह पेमेंट नहीं करता, तो पूरा बोझ खरीदार पर आ जाता है, जिससे क्रेडिट स्कोर खराब होने और कानूनी पचड़ों का खतरा बढ़ जाता है। ED दिल्ली-NCR रीजन में AVJ Developers और Rudra Buildwell Construction जैसी कंपनियों के खिलाफ भी जांच कर रही है कि इन स्कीमों को कैसे मैनेज किया गया और ग्राहकों को क्या वित्तीय नुकसान हुआ।

खरीदारों के लिए सुरक्षा उपाय और जांच

रेगुलेटर ने प्रॉपर्टी डील फाइनल करने से पहले खरीदारों के लिए कई चेतावनी संकेतों की लिस्ट जारी की है। एजेंसी की सलाह है कि सिर्फ ब्रोकर की बातों या अनौपचारिक बुकिंग फॉर्म पर भरोसा न करें। इसके बजाय, एक फॉर्मल लिखित एग्रीमेंट या रजिस्टर्ड सेल डीड पर जोर दें। सबसे बड़ा बचाव RERA रजिस्ट्रेशन नंबर को ऑफिशियल स्टेट पोर्टल्स पर चेक करना है, जिससे पता चलता है कि प्रोजेक्ट अप्रूव्ड है या नहीं। निवेशकों को उन स्कीमों से भी सावधान रहना चाहिए जो बाय-बैक की गारंटी देती हैं या बड़े, अस्पष्ट डिस्काउंट ऑफर करती हैं, क्योंकि इनमें अक्सर जरूरी एसेट सिक्योरिटी की कमी होती है। अब निवेशकों को कैपिटल लगाने से पहले जमीन के लीगल टाइटल और सभी जरूरी अप्रूवल की पुष्टि करनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.