Enforcement Directorate (ED) ने छत्तीसगढ़ में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड में गड़बड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत **₹31.7 करोड़** की संपत्ति अटैच कर ली है।
सरकारी फंड के दुरुपयोग पर नकेल कसते हुए Enforcement Directorate (ED) ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹31.7 करोड़ की संपत्ति को प्रोविजनल तौर पर अटैच कर लिया है। यह फंड मुख्य रूप से खनन प्रभावित इलाकों में विकास और बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित किया गया था, जिसे कथित तौर पर फर्जी टेंडर और ऊंचे प्रोक्योरमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए डायवर्ट किया गया।
कैसे होता था घोटाला?
जांच में खुलासा हुआ है कि इस खेल में सरकारी अधिकारियों और प्राइवेट बिचौलियों का एक बड़ा नेटवर्क शामिल था। ED के मुताबिक, ये लोग वर्क ऑर्डर में गड़बड़ी करते थे और खरीद आदेशों पर 25% से लेकर 50% तक का कमीशन वसूला जाता था, जिससे प्रोजेक्ट की लागत कृत्रिम रूप से बढ़ा दी गई थी।
किन संस्थाओं पर है नजर?
यह जांच मुख्य रूप से 'छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम' (Chhattisgarh Rajya Beej Evam Krishi Vikas Nigam) के प्रोक्योरमेंट प्रोसेस पर केंद्रित है। इस कार्रवाई के बाद, इस पूरे केस में अब तक कुल ₹50 करोड़ की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
कानूनी कार्रवाई और प्रभाव
ED ने Prevention of Money Laundering Act के तहत 29 अक्टूबर को अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया और 30 अक्टूबर को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में सप्लीमेंट्री प्रोसीक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की। इस मामले में IAS अधिकारी रानू साहू सहित 4 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह मामला सरकारी टेंडर और गवर्नेंस में पारदर्शिता की अहमियत को रेखांकित करता है। भविष्य में इस मामले से जुड़ी कानूनी कार्यवाही और सरकारी नीतियों में सुधार के संकेत बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे।
