Enforcement Directorate (ED) ने उत्तर प्रदेश स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को कुर्क कर लिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस निजी संस्थान को खड़ा करने के लिए सरकारी फंड और कॉन्ट्रैक्ट्स का गलत इस्तेमाल किया गया है।
एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक बड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए करीब ₹1,170 करोड़ की संपत्तियों को अटैच कर लिया है। यह कदम यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की लंबी जांच के बाद उठाया गया है।
सरकारी फंड के दुरुपयोग का आरोप
जांच में यह सामने आया है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान से जुड़ी इस यूनिवर्सिटी के निर्माण में वैध प्राइवेट कैपिटल के बजाय सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के मुताबिक, कैंपस के कुल कंस्ट्रक्शन खर्च और वैध आय के स्रोतों में भारी अंतर है। कुल निवेश में से केवल ₹72.63 करोड़ का ही स्पष्ट फाइनेंशियल सोर्स मिला है, जबकि बाकी पैसा संदिग्ध डोनेशन और सरकारी फंड के डायवर्जन से आया बताया जा रहा है।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का विवाद
एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के कॉन्ट्रैक्ट्स पाने वाले ठेकेदारों पर कथित तौर पर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट को अपनी कमाई का एक हिस्सा देने का दबाव बनाया गया था। इसके अलावा, अस्पताल और हॉस्टल जैसे पब्लिक एसेट्स के लिए आवंटित फंड को यूनिवर्सिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप हैं। जांच में यह भी पता चला है कि जमीन के मालिकाना हक को लेकर सरकारी आदेशों में भी बदलाव किए गए थे।
आगे क्या?
यह मामला पूर्व मंत्री के खिलाफ चल रही कानूनी चुनौतियों का हिस्सा है, जो पहले से ही जालसाजी के मामलों में जेल में हैं। वर्तमान में, ED पुलिस की दर्जनों रिपोर्ट्स को खंगालकर ट्रस्ट के नेतृत्व के खिलाफ एक मजबूत केस तैयार कर रही है। निवेशकों और सरकारी सेक्टर पर नजर रखने वालों के लिए यह एक चेतावनी है कि पारदर्शिता की कमी और सरकारी फंड के गलत इस्तेमाल पर रेगुलेटरी एजेंसियां अब बेहद सख्त हैं।
