Rs 30,000 Crore Cyber Fraud: ED का बड़ा एक्शन, तीन और आरोपी गिरफ्तार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Rs 30,000 Crore Cyber Fraud: ED का बड़ा एक्शन, तीन और आरोपी गिरफ्तार

Enforcement Directorate (ED) ने **₹30,000 करोड़** के मनी लॉन्ड्रिंग और 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले में तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। यह जांच अब **20** राज्यों के **400** बैंक खातों तक फैल चुकी है, जो बैंकिंग और फिनटेक सेक्टर के लिए बड़ा जोखिम है।

जांच का दायरा और गिरफ्तारियां

Enforcement Directorate (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट पर शिकंजा कसते हुए भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू को हिरासत में लिया है। इन तीनों को 1 सितंबर, 2026 तक की रिमांड पर भेजा गया है। इस मामले में अब तक कुल 5 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क?

यह मामला जून 2025 में गोवा में हुए एक 'डिजिटल अरेस्ट' से शुरू हुआ, जिसमें एक पीड़ित से ₹2.60 करोड़ की ठगी हुई थी। जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने करीब 400 बैंक खातों और शेल कंपनियों का जाल बिछाया था। इन खातों के जरिए ₹27,850 करोड़ से अधिक का ट्रांजैक्शन किया गया है। ठगों ने इन खातों को अक्सर अपने कर्मचारियों या ड्राइवरों के नाम पर खुलवाया था ताकि असली लाभार्थियों की पहचान छिपाई जा सके। पैसे को फॉरेन करेंसी या कैश के रूप में निकाल लिया जाता था ताकि डिजिटल फुटप्रिंट न छूटे।

बैंकिंग और फिनटेक सेक्टर पर असर

यह घोटाला देश भर के 163 FIRs से जुड़ा है। अब बैंकिंग, फिनटेक प्लेटफॉर्म और मनी चेंजर्स पर अपनी KYC और Anti-Money Laundering (AML) प्रोसेस को और सख्त करने का दबाव बढ़ गया है। रेगुलेटरी सख्ती के कारण फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस की कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ सकती है, क्योंकि सेंट्रल बैंक अब और अधिक कड़ी निगरानी की तैयारी में है। निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे जांच के अगले चरणों पर नजर रखें, क्योंकि इससे मार्केट के रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स में बड़े बदलाव आ सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.