Enforcement Directorate ने Karnataka Public Service Commission (KPSC) के चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. सहूकर और सदस्य बी.वी. गीता को भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया है। यह मामला वेटरनरी ऑफिसर पदों के लिए करोड़ों की रिश्वतखोरी से जुड़ा है।
इस मामले में जांच का दायरा काफी बढ़ा है। फेडरल एजेंसी ने 6 अक्टूबर, 2026 को ये गिरफ्तारियां की हैं, जो सरकारी नौकरियों में हो रही धांधली के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।\n\n### घूसखोरी का बड़ा खेल\n\nजांच में पता चला है कि 400 वेटरनरी ऑफिसर पदों की भर्ती में संगठित तरीके से भ्रष्टाचार किया गया। आरोप है कि उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ₹70 लाख से लेकर ₹80 लाख तक की वसूली की जा रही थी। इतना ही नहीं, एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि कैसे क्वेश्चन पेपर लीक किए गए और OMR शीट के साथ छेड़छाड़ कर चुनिंदा उम्मीदवारों को फायदा पहुँचाया गया।\n\n### कौन-कौन है इस रैकेट में?\n\nइस गिरफ्तारी से पहले, ED ने पूर्व KPSC परीक्षा नियंत्रक (IAS अधिकारी) ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बिचौलिए बसवराज कन्नाले को भी पकड़ा था। ED अब उन फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और बातचीत के सबूतों को खंगाल रही है जो बिचौलियों और आयोग के स्टाफ के बीच हुए थे।\n\nचूंकि KPSC एक संवैधानिक संस्था है और यह कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है, इसलिए शेयर बाजार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, आने वाले समय में 2024 से 2026 के बीच हुई सभी भर्तियों की जांच का दायरा बढ़ सकता है, जिससे राज्य प्रशासन पर जवाबदेही का भारी दबाव बढ़ गया है।
