ED की बड़ी कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग केस में इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल जितेश गुप्ता गिरफ्तार

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AuthorAditya Rao|Published at:
ED की बड़ी कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग केस में इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल जितेश गुप्ता गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 12 अगस्त 2026 को इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल जितेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के इरादे से इंसॉल्वेंसी प्रक्रियाओं में हेरफेर किया। बेस्ट फूड्स (Best Foods) मामले से जुड़ी इस जांच में यह बात सामने आई है कि गुप्ता ने प्रमोटरों को फायदा पहुंचाने के लिए पहले से खारिज किए गए दावों को फिर से स्वीकार किया। यह इस साल इस तरह की दूसरी हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी है, जो भारत के इंसॉल्वेंसी ढांचे के दुरुपयोग पर बढ़ते नियामक शिकंजे को दर्शाती है।

जितेश गुप्ता पर क्या हैं आरोप?

12 अगस्त 2026 को, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act) के तहत इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल जितेश गुप्ता को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई बेस्ट फूड्स (Best Foods) और उससे जुड़ी कंपनियों की इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं की एक बड़ी जांच का हिस्सा है। गुप्ता, होमस्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड (Homestead Infrastructure Development Private Limited) और गोल्डन पीकॉक रेजिडेंस प्राइवेट लिमिटेड (Golden Peacock Residence Private Limited) के अंतरिम समाधान पेशेवर (Interim Resolution Professional) और बाद में समाधान पेशेवर (Resolution Professional) रह चुके हैं।

ED का आरोप है कि गुप्ता ने कॉर्पोरेट ऋण समाधान प्रक्रिया (corporate debt resolution process) में हेरफेर किया। जांच के अनुसार, गुप्ता ने कथित तौर पर उन दावों को फिर से स्वीकार किया था जिन्हें पहले नकली या जाली बताकर खारिज कर दिया गया था। दावों की सूची बदलकर, उन्होंने लेनदारों की समिति (Committee of Creditors) की संरचना को बदल दिया। लेनदारों की समिति ही वह समूह है जिसके पास कंपनी की ऋण समाधान योजना (debt resolution plan) को मंजूरी या अस्वीकार करने की शक्ति होती है। ED के मुताबिक, इस कदम से पूर्व प्रमोटर दिनेश गुप्ता (Dinesh Gupta) के एक प्रॉक्सी द्वारा प्रस्तुत समाधान योजना को facilitar मिली, जिसे उनके नियंत्रण वाली संस्थाओं द्वारा फंड किया गया था। एजेंसी को जितेश गुप्ता द्वारा बेस्ट फूड्स समूह से जुड़े व्यक्तियों से प्राप्त अस्पष्ट बैंक लेनदेन के सबूत भी मिले हैं।

इंसॉल्वेंसी पेशेवरों पर बढ़ रहा शिकंजा

यह घटना इंसॉल्वेंसी पेशेवरों को निशाना बनाने वाली नियामक कार्रवाइयों के बढ़ते पैटर्न का हिस्सा है। फरवरी 2026 में, ED ने इसी तरह के अपराधों के लिए रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Richa Industries Limited) के पूर्व समाधान पेशेवर अरविंद कुमार (Arvind Kumar) को गिरफ्तार किया था। उस मामले में, कुमार पर पूर्व प्रमोटरों के साथ मिलकर शेल संस्थाओं से बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों को स्वीकार करने का आरोप लगाया गया था, जिससे वास्तविक लेनदारों की वोटिंग पावर कम हो गई थी। ये आरोप साबित होने पर, ऋणदाताओं के लिए गंभीर वित्तीय परिणाम हो सकते हैं, जिन्हें अक्सर अपने ऋणों पर भारी 'कटौती' (haircuts) का सामना करना पड़ता है।

NCLT की चिंताएं और आगे क्या?

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (National Company Law Tribunal) ने पहले ही जितेश गुप्ता के आचरण पर चिंता जताई थी। 9 सितंबर 2025 के एक आदेश में, ट्रिब्यूनल ने कहा था कि गुप्ता ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर काम किया था और उन्हें बदलने का आदेश दिया था। ED की वर्तमान जांच से पता चलता है कि ऐसी गतिविधियां बैंकिंग प्रणाली को अस्थिर करने और व्यक्तिगत लाभ के लिए संपत्ति की हेराफेरी की सुविधा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की जा सकती हैं।

निवेशकों और लेनदारों के लिए, ये गिरफ्तारियां दर्शाती हैं कि नियामक निकाय संकटग्रस्त संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नियुक्त पेशेवरों के आचरण पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। ऋण समाधान के दौरान मूल्य की सुरक्षा के लिए इंसॉल्वेंसी ढांचे की अखंडता महत्वपूर्ण है। आगे चलकर, इन चल रही जांचों की प्रगति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, और यह देखना होगा कि क्या वे समाधान पेशेवरों के लिए सख्त निगरानी या अपडेट किए गए नियमों की ओर ले जाते हैं ताकि इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में बेहतर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

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