Election Commission में भारी खींचतान, 13 करोड़ वोटर लिस्ट से बाहर होने पर उठे सवाल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Election Commission में भारी खींचतान, 13 करोड़ वोटर लिस्ट से बाहर होने पर उठे सवाल

Election Commission of India (ECI) के भीतर बड़ी हलचल मची है। दो कमिश्नरों ने वोटर्स के नाम हटाने की प्रक्रिया पर **14** गंभीर आपत्तियां जताई हैं। देशभर में **13 करोड़** से ज्यादा नाम हटाए जाने से राजनीतिक गलियारों में खलबली है और मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है।

भारत के मुख्य चुनाव आयोग (ECI) में संस्थागत मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में हुए 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) पर 14 आपत्तियां दर्ज कराई हैं। यह विवाद मुख्य रूप से वोटर रजिस्ट्रेशन प्रोटोकॉल और नामों को लिस्ट से बाहर करने की प्रक्रिया को लेकर है।\n\nआंकड़ों के मुताबिक, देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। इनमें दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्य सबसे आगे हैं। इस बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने पारदर्शिता और कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।\n\nबाजार के नजरिए से देखें तो संवैधानिक संस्थाओं की स्थिरता किसी भी रेगुलेटरी एनवायरमेंट के लिए बेहद अहम होती है। निवेशक किसी भी प्रमुख सरकारी संस्था में चल रहे आंतरिक विवाद को गवर्नेंस रिस्क के रूप में देखते हैं, जो प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं की निरंतरता पर असर डाल सकता है।\n\nमामले की गंभीरता को देखते हुए समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग इस आंतरिक कलह को कैसे सुलझाता है और क्या सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई निर्देश जारी होता है, जो भविष्य के लिए स्पष्टता प्रदान कर सके।

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