दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। इसमें हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट और मेट्रो सेवाओं पर लगी रोक को सही ठहराते हुए बिना शर्त माफी मांगी गई है।
कोर्ट में पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में यह आधिकारिक हलफनामा उस अवमानना मामले (Contempt Case) के जवाब में दायर किया है, जो राजधानी में हुए हालिया प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर शुरू हुआ था। पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 172 के तहत ये कदम उठाए गए थे।
पाबंदियों का डेटा
हलफनामे के मुताबिक, मेट्रो नेटवर्क के 15% यानी कुल 303 में से 45 स्टेशनों को बंद करना पड़ा था, लेकिन 9 अक्टूबर के आदेश के बाद रात 10 बजे तक सेवाएं पूरी तरह बहाल कर दी गई थीं। इंटरनेट सस्पेंशन पर पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह पूरे शहर में नहीं था, बल्कि रायसीना हिल्स के 4 किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा खतरों को देखते हुए सीमित तौर पर लागू किया गया था।
विरोध प्रदर्शन और हकीकत
पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन की स्थिति उनके अनुमान से कहीं अधिक गंभीर थी। अनुमति सिर्फ 1,000 लोगों की थी, जबकि वहां 35,000 लोग जुट गए। इस अफरा-तफरी में 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। हिरासत में लिए गए लोगों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस ने कहा कि उन्हें उचित देखभाल और ताजा भोजन उपलब्ध कराया गया था।
कोर्ट से अपील
कमिश्नर कुमार ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमलया बागची की पीठ के सामने बिना शर्त माफी मांगते हुए कोर्ट से अवमानना नोटिस को वापस लेने का अनुरोध किया है। पुलिस का तर्क है कि न्यायिक आदेशों का कोई जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया है। अब कोर्ट के फैसले पर ही इस मामले का भविष्य टिका है।
