दिल्ली में चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस ने **27** FIR दर्ज की हैं। चुनावी रोल में बदलाव को लेकर उपजे इस विवाद के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जिसका सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता दिख रहा है।
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के मामले में 27 FIR दर्ज की हैं। यह मामला सितंबर के आखिर से शुरू हुए प्रदर्शनों से जुड़ा है, जो इलेक्टोरल रोल के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर विवादों में है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि CEC ने अन्य कमिश्नरों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले लिए हैं।\n\n### पुलिस की कार्रवाई और कानूनी शिकंजा\n\nपुलिस द्वारा दर्ज की गई इन रिपोर्ट्स में लोक सेवकों के काम में बाधा डालने और आपराधिक बल प्रयोग करने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। इस मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे प्रमुख राजनीतिक नाम भी शामिल हैं। फिलहाल, पुलिस डिजिटल सबूतों और मोबाइल फुटेज के जरिए उन लोगों की पहचान कर रही है जो सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प में शामिल थे।\n\n### सुरक्षा का कड़ा पहरा और व्यापार पर असर\n\nप्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राजधानी में करीब 23,000 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। इन सुरक्षा उपायों के चलते मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों को रद्द करने जैसे कदम उठाए गए हैं, जिससे शहर के सामान्य कामकाज और रसद (Logistics) पर बुरा असर पड़ा है। \n\nनिवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर मार्केट सेंटिमेंट पर पड़ता है। बाजार हमेशा स्थिरता पसंद करता है, और इस तरह के लंबे सुरक्षा कैंपडाउन स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को बाधित कर सकते हैं। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन कब तक स्थिति को पूरी तरह सामान्य कर पाता है।
