दिल्ली हाई कोर्ट ने ANI बनाम OpenAI मामले में एक अहम अंतरिम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने AI मॉडल्स को 'फेयर डीलिंग' (fair dealing) के तहत ट्रेनिंग जारी रखने की इजाजत दे दी है। यह डेवलपर्स के लिए फिलहाल बड़ी राहत है, लेकिन अंतिम फैसले तक कानूनी अनिश्चितता बनी रहेगी।
कॉपीराइट चिंता पर कोर्ट का रुख
दिल्ली हाई कोर्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेवलपर्स को बड़ी राहत देते हुए एक अंतरिम आदेश जारी किया है। यह फैसला कॉपीराइट उल्लंघन की बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। समाचार एजेंसी ANI द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए, कोर्ट ने कहा कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) को प्रशिक्षित करने के लिए ANI की कॉपीराइट सामग्री का उपयोग जारी रखा जा सकता है।
'फेयर डीलिंग' का महत्व
कोर्ट का यह अवलोकन भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 52(1)(a) के तहत 'फेयर डीलिंग' (fair dealing) की छूट की व्याख्या पर केंद्रित है। जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि इस प्रारंभिक चरण में, AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए सामग्री का उपयोग 'फेयर डीलिंग' के दायरे में आ सकता है, क्योंकि यह निजी या व्यक्तिगत शोध के समान है। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है, क्योंकि यह उन AI प्रशिक्षण प्रक्रियाओं को तत्काल रोक से बचाता है जो समाचार और मीडिया सामग्री के बड़े डेटासेट पर निर्भर करती हैं।
AI उद्योग के लिए तात्कालिक राहत
AI उद्योग और इसके हितधारकों के लिए, यह फैसला एक अस्थायी परिचालन सुरक्षा प्रदान करता है। अगर कोर्ट AI फर्मों को प्रशिक्षण में उपयोग की जाने वाली प्रत्येक सामग्री के लिए अलग-अलग लाइसेंस प्राप्त करने का आदेश देता, तो इससे इस क्षेत्र के लिए भारी लागत और परिचालन बाधाएं पैदा होतीं। 'फेयर डीलिंग' के तहत इसे स्वीकार करके, कोर्ट ने प्रभावी रूप से इन प्लेटफार्मों को फिलहाल मौजूदा ढांचे के तहत काम जारी रखने की अनुमति दी है।
अंतिम फैसले का इंतजार
हालांकि, यह निर्णय अंतिम कानूनी मिसाल नहीं है। यह एक अंतरिम, तथ्य-विशिष्ट फैसला है, जिसका अर्थ है कि कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। मुख्य मुकदमा अभी भी लंबित है, और आगे की सुनवाई 11 सितंबर, 2026 को निर्धारित है। कानूनी विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि 'फेयर डीलिंग' एक रक्षात्मक तर्क है, न कि पूर्ण अधिकार। इसका अनुप्रयोग इस बात पर निर्भर करता है कि डेटा का उपयोग कैसे किया जाता है, सामग्री की मात्रा कितनी है, और मूल प्रकाशक के बाजार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
AI क्षेत्र की निगरानी करने वाले निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि अंतिम निर्णय AI कंपनियों के लिए दीर्घकालिक अनुपालन परिदृश्य को परिभाषित करेगा। अंतिम फैसले में कोई भी बदलाव या सख्त व्याख्या AI कंपनियों को डेटा अधिग्रहण की अलग रणनीतियों को अपनाने या स्पष्ट लाइसेंसिंग की तलाश करने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे उनके लाभ मार्जिन और परिचालन दक्षता प्रभावित हो सकती है। भारत में 'टेक्स्ट एंड डेटा माइनिंग' के लिए किसी विशिष्ट, स्पष्ट विधायी ढांचे की अनुपस्थिति का मतलब है कि जब तक कोर्ट अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक AI डेवलपर्स के लिए नियामक जोखिम एक प्रमुख कारक बना रहेगा।
