Delhi High Court ने कनाडा सरकार को भारत में सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है। यह मामला ओंटारियो के पूर्व अधिकारी द्वारा कथित तौर पर चुराए गए **CAD 33.3 मिलियन** की रिकवरी से जुड़ा है।
Delhi High Court ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कनाडा सरकार को भारत में सिविल मुकदमा आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। यह पूरा मामला ओंटारियो सरकार के पूर्व अधिकारी संजय मदान द्वारा कथित तौर पर हड़पे गए CAD 33.3 मिलियन (करीब ₹200 करोड़ से अधिक) की रिकवरी पर केंद्रित है। जस्टिस विकास महाजन ने प्रतिवादी की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि यह मुकदमा केवल कनाडा में ही सुना जाना चाहिए।
विवाद की जड़
यह मामला ओंटारियो शिक्षा मंत्रालय में सामने आए एक बड़े फ्रॉड से जुड़ा है। साल 2023 में संजय मदान को कनाडा की अदालत ने 2011 से 2020 के बीच किए गए वित्तीय घोटालों के लिए दोषी ठहराया था। जांच में सामने आया कि उन्होंने महामारी राहत प्रोग्राम और आईटी कॉन्ट्रैक्ट्स में हेरफेर कर मोटी रिश्वत ली थी। घोटाले का पैसा भारत के विभिन्न बैंक खातों में जमा किया गया था।
भारत में केस क्यों जरूरी?
भारतीय कानून (Civil Procedure Code की धारा 44A) के तहत कनाडा 'Reciprocating Territory' नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि कनाडाई अदालत के आदेश को सीधे भारत में लागू नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि कनाडा सरकार को अपनी संपत्ति पर दावा ठोकने के लिए भारतीय सिस्टम में स्वतंत्र सिविल मुकदमा लड़ना पड़ रहा है।
कोर्ट का अधिकार क्षेत्र पर रुख
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संपत्ति का स्थान ही भारत में कानूनी कार्रवाई का आधार है। यह फैसला जून 2025 में हुए उस घटनाक्रम से अलग है, जिसमें भारत के बैंक खातों से लगभग ₹65.9 करोड़ कनाडा वापस भेजे गए थे। अब यह केस 'मेरिट हियरिंग' चरण में जाएगा, जहाँ फॉरेन्सिक अकाउंटिंग के जरिए संपत्ति की सही वैल्यू और निवेश पर मिले मुनाफे का पता लगाया जाएगा। हालांकि, विदेशी फैसलों को ऑटोमैटिक मान्यता न मिलने के कारण यह कानूनी प्रक्रिया अभी लंबी खिंच सकती है।
