Delhi High Court ने Fortis Healthcare, IHH Healthcare और RHT Health Trust के ट्रांजेक्शन की फोरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए हैं। यह मामला Daiichi Sankyo की पुरानी कानूनी लड़ाई से जुड़ा है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने Fortis Healthcare, IHH Healthcare और RHT Health Trust के बीच हुए सभी ट्रांजेक्शन की व्यापक फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया है। यह कदम जापान की दवा कंपनी Daiichi Sankyo द्वारा कंपनी के पूर्व प्रमोटर्स, मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में एक अहम मोड़ है।
ऑडिट के दायरे में क्या है?
यह जांच मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित होगी कि क्या एसेट्स (assets) को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया या अदालती आदेशों का उल्लंघन किया गया। ऑडिट के दायरे में साल 2018 में IHH Healthcare द्वारा Fortis में 31% हिस्सेदारी का अधिग्रहण शामिल है, जो लगभग ₹4,000 करोड़ की डील थी। इसके अलावा, RHT Singapore को कथित तौर पर ट्रांसफर किए गए ₹4,666 करोड़ की भी जांच होगी, जो $4.6 बिलियन के आर्बिट्रेशन अवार्ड की रिकवरी प्रक्रिया का हिस्सा है।
निवेशकों पर क्या असर?
भले ही Fortis का मौजूदा मैनेजमेंट ऑपरेशनल विस्तार और बिजनेस को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है, लेकिन यह ऑडिट कंपनी के पुराने विवादों को फिर से हवा दे रहा है। हालिया फाइनेंशियल रिजल्ट्स में कंपनी का प्रदर्शन शानदार रहा है, जिसमें ₹2,545 करोड़ का रेवेन्यू और ₹273 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2022 के निर्देशों के बाद हो रही यह जांच निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ा सकती है। मार्केट अब इस बात पर नजर रखेगा कि क्या इस जांच से कोई नई वित्तीय अनियमितताएं सामने आती हैं या नहीं।
