Delhi High Court ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी 15 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने राजनीतिक नेताओं के खिलाफ FIR और SIT जांच की मांग को ठुकराते हुए सालों से चले आ रहे कानूनी विवाद पर विराम लगा दिया है।
सालों से जारी कानूनी जंग का अंत
5 अक्टूबर, 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उन 15 याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की न्यायिक जांच की मांग की गई थी। कोर्ट ने प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और एक स्वतंत्र स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने के आग्रह को सिरे से नकार दिया।
किन पार्टियों पर था विवाद?
यह मामला काफी समय से सुर्खियों में था, जिसमें भाजपा (BJP), इंडियन नेशनल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के कई दिग्गज नेता शामिल थे। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि इन नेताओं के भड़काऊ बयानों ने फरवरी 2020 में हुई हिंसा को हवा दी थी, जिसमें 53 लोगों की जान गई थी और करीब 700 लोग घायल हुए थे।
गवर्नेंस और कानूनी स्थिरता
भले ही राजनीतिक घटनाक्रम सीधे कंपनियों के बैलेंस शीट को प्रभावित नहीं करते, लेकिन निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स के लिए यह फैसला 'गवर्नेंस क्लाइमेट' के लिहाज से अहम है। लंबे समय से चल रही कानूनी अनिश्चितता का खत्म होना सार्वजनिक डोमेन में एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के बाद अब नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या याचिकाकर्ता इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हैं। फिलहाल के लिए, कोर्ट ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के खिलाफ जांच की मांग को भी आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है।
