दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से जुड़े **7** टैक्स ट्रिब्यूनल आदेशों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने प्रक्रिया में भारी खामियां पाते हुए इन मामलों की दोबारा सुनवाई के आदेश दिए हैं, जिससे कंपनी की पुरानी टैक्स देनदारियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के फैसलों पर तीखी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने न्यायाधिकरण की कार्यप्रणाली को 'लापरवाह' करार देते हुए कहा कि इनमें गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटियां थीं। कोर्ट ने पाया कि 6 अगस्त और 13 अगस्त, 2025 को अलग-अलग तारीखों पर हुई सुनवाई को एक ही सामान्य आदेश में जोड़ दिया गया था, जो न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। अब इन सभी 7 मामलों को एक अलग बेंच के समक्ष फिर से सुना जाएगा।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि यह कानूनी विवाद 'पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड' (जो एक अनलिस्टेड कंपनी है) से जुड़ा है, न कि शेयर बाजार में लिस्टेड 'पतंजलि फूड्स' से। यह मामला मुख्य रूप से असेसमेंट ईयर 2013-14 से 2015-16 और 2017-18 की टैक्स असेसमेंट से संबंधित है।
Patanjali Foods का प्रदर्शन
जहां एक तरफ अनलिस्टेड कंपनी कानूनी पेचीदगियों में फंसी है, वहीं लिस्टेड इकाई Patanjali Foods ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में मजबूत आंकड़े पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू 27% बढ़कर ₹113.4 अरब रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 87% उछलकर ₹3.36 अरब पर पहुंच गया। हालांकि, इन बेहतरीन नतीजों के बावजूद स्टॉक में हालिया उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिसका बड़ा कारण वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताएं बताई जा रही हैं।
आगे की राह
फिलहाल, पतंजलि आयुर्वेद की टैक्स देनदारियों पर सस्पेंस बना हुआ है। जब तक नई बेंच इस पर अंतिम निर्णय नहीं लेती, बाजार इस पर नजर बनाए रखेगा।
