12 अक्टूबर, 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए निचली अदालत से PepsiCo के 'Sting' और 'Adrenaline Rush' को 'एनर्जी ड्रिंक' के रूप में प्रतिबंधित करने पर लिखित जवाब मांगा है। फिलहाल प्रोडक्शन पर रोक जारी है, जिससे कंपनी के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
कानूनी उलझन और रेगुलेटरी विवाद
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि PepsiCo India को 'एनर्जी ड्रिंक' लेबल के इस्तेमाल को लेकर जो प्रतिबंध झेलने पड़ रहे हैं, उसका पुख्ता कानूनी आधार होना चाहिए। कोर्ट ने सिंगल-जज बेंच को 1 सप्ताह के भीतर अपना फैसला लिखित रूप में देने का निर्देश दिया है। वर्तमान में, हालांकि बाजार में मौजूद स्टॉक को बेचने की अनुमति है, लेकिन नए बैच का प्रोडक्शन फिलहाल रुका हुआ है।
क्यों मचा है बवाल?
विवाद की मुख्य जड़ भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) का वह निर्देश है, जिसमें 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द को भ्रामक बताया गया है। FSSAI का तर्क है कि 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' के तहत 'एनर्जी ड्रिंक' कोई मान्यता प्राप्त श्रेणी ही नहीं है। PepsiCo ने अपनी दलीलों में कहा है कि उसे बदलाव के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला, जबकि बाजार के मानक इसकी इजाजत देते हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Business Risk)
इस कानूनी लड़ाई का असर कंपनी के ऑपरेशनल खर्च पर पड़ सकता है। यदि अदालत FSSAI के फैसले पर मुहर लगाती है, तो PepsiCo को अपनी पैकेजिंग पूरी तरह से बदलनी पड़ सकती है। इससे न केवल री-ब्रांडिंग और प्रिंटिंग का भारी खर्च आएगा, बल्कि सप्लाई चेन में भी बड़ी बाधा उत्पन्न हो सकती है।
समानता की तलाश
दिलचस्प बात यह है कि PepsiCo ने कोर्ट के सामने 'Red Bull' मामले का हवाला दिया है, जहां पहले एक सिंगल-जज बेंच ने FSSAI के इसी तरह के आदेश को खारिज कर दिया था। अब डिवीजन बेंच यह देख रही है कि क्या अलग-अलग कंपनियों के लिए रेगुलेटरी नियम समान रूप से लागू हो रहे हैं या नहीं। अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 5 नवंबर, 2026 को तय की गई है, जिस पर पूरी इंडस्ट्री की नजरें टिकी हैं।
