Delhi HC का ऐतिहासिक फैसला: अब महिलाएं भी हो सकती हैं गैंगरेप की दोषी

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AuthorMehul Desai|Published at:
Delhi HC का ऐतिहासिक फैसला: अब महिलाएं भी हो सकती हैं गैंगरेप की दोषी

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर कोई महिला गैंगरेप में मददगार (Facilitator) की भूमिका निभाती है, तो उस पर भी गैंगरेप के आरोप तय किए जा सकते हैं। शारीरिक रूप से शामिल न होने के बावजूद कानून अब ऐसे मामलों में सामूहिक जिम्मेदारी तय करेगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि गैंगरेप के मामलों में केवल शारीरिक रूप से शामिल होना ही अपराध नहीं है। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जो लोग अपराध में मददगार (Facilitator) की भूमिका निभाते हैं, उन्हें भी गैंगरेप का दोषी माना जाएगा, चाहे वह महिला ही क्यों न हो।

कानूनी व्याख्या और धाराएं

यह फैसला IPC की धारा 376D और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70 की व्याख्या पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि कानून का उद्देश्य सामूहिक इरादे (Shared Intention) को दंडित करना है। इसका मतलब यह है कि अपराध में शामिल प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसकी भूमिका जो भी हो, समान रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।

मामला क्या था?

यह कानूनी मिसाल जुलाई 2024 में भलस्वा डेयरी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले से सामने आई। आरोप है कि एक महिला ने अपनी नाबालिग बेटी को डरा-धमकाकर एक पुरुष सह-आरोपी के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। आरोपी महिला ने दलील दी थी कि बलात्कार की परिभाषा में अक्सर पुरुषों का जिक्र होता है, इसलिए उस पर गैंगरेप के आरोप नहीं लगने चाहिए।

कोर्ट का रुख

अदालत ने एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) रोहन जे. अल्वा के तर्कों से सहमति जताते हुए इस दलील को खारिज कर दिया। 17 जनवरी, 2025 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जेंडर (Gender) के आधार पर अपराध की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। यह फैसला यौन हिंसा के मामलों में 'ग्रुप लायबिलिटी' को लेकर एक कड़ा कानूनी मानक तय करता है।

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