दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि सभी थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगाई जाएं और उनके लिए अलग वॉशरूम की सुविधा हो। कोर्ट ने मौजूदा सुविधाओं का जायजा लेने के लिए छह हफ्ते का सर्वे भी अनिवार्य किया है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।
कोर्ट का अहम निर्देश
बुधवार, 5 अगस्त 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को आदेश दिया है कि राजधानी के सभी पुलिस थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें स्थापित की जाएं और उनके इस्तेमाल के लिए अलग से वॉशरूम बनाए जाएं। इस फैसले का मकसद महिला अफसरों के लिए कार्यस्थल पर स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को दूर करना है।
सर्वे और समय-सीमा
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजा खरिया की बेंच ने पुलिस कमिश्नर को अगले छह हफ्तों के अंदर सभी थानों का सर्वे कर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वहां माहवारी स्वच्छता संबंधी सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं। सर्वे के बाद पुलिस विभाग को इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की रूपरेखा बतानी होगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 तय की है, जिसमें इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की जाएगी।
याचिका और संवैधानिक अधिकार
यह फैसला NGO जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर आया है। याचिका में कहा गया था कि कार्यस्थल पर स्वच्छता की बुनियादी सुविधाओं की कमी महिला पुलिसकर्मियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। इसमें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा, स्वास्थ्य, निजता और मानवीय कामकाजी परिस्थितियों के अधिकार का हनन बताया गया।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जुटाई गई जानकारी से पता चला कि बहुत कम पुलिस थानों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें हैं और कई जगहों पर समर्पित सुविधाएं न के बराबर हैं। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से काम करने का माहौल असमान हो जाता है।
प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे पर असर
यह आदेश सार्वजनिक संस्थानों में कार्यस्थल के मानकों पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है। दिल्ली पुलिस को अब इन सुविधाओं को अपने बुनियादी ढांचे की योजना में शामिल करना होगा। इसके लिए वर्तमान कमियों का पता लगाना होगा और वेंडिंग मशीनों की खरीद व स्थापना के साथ-साथ वॉशरूम के निर्माण या नवीनीकरण के लिए बजट आवंटित करना पड़ सकता है।
इस दिशा में प्रगति सर्वे के नतीजों और पुलिस प्रशासन के कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। सरकारी ठेकों या संस्थागत आपूर्तिकर्ताओं पर नज़र रखने वाले निवेशक या विश्लेषक इस बात पर ध्यान दे सकते हैं कि क्या यह निर्देश अन्य सरकारी विभागों और कार्यालयों में भी स्वच्छता बुनियादी ढांचे के लिए व्यापक मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) स्थापित करेगा।
